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राजस्थान में कंक्रीट के जंगल की बाढ़! इकोलॉजिकल क्षेत्र पर बढ़ते अवैध निर्माण

राजस्थान में 700 हेक्टेयर से ज्यादा इकोलॉजिकल जमीन पर अवैध निर्माण हो गया है। हाईकोर्ट ने इसे रोकने के आदेश दिए, लेकिन प्रशासन ने अनदेखी कर दी।

अवैध निर्माण कैसे बढ़ा?

  • जयपुर के आगरा रोड और आमेर तहसील समेत उदयपुर और अजमेर में इकोलॉजिकल क्षेत्र पर अवैध निर्माण हो रहा है।
  • हाईकोर्ट ने इन क्षेत्रों की मूल स्थिति बहाल करने का आदेश दिया था, लेकिन कंक्रीट के जंगल बढ़ते ही गए।
  • नगरीय विकास विभाग को इसकी जानकारी है, लेकिन अफसर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।

सरकार का क्या पक्ष है?

  • सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में छूट मांगी है।
  • पहले 2006 के मास्टर प्लान में 481 वर्ग किमी इकोलॉजिकल क्षेत्र था, लेकिन बाद में 80 वर्ग किमी का भू-उपयोग बदलकर वहां शैक्षणिक संस्थानों को जमीन दी गई
  • मास्टर प्लान 2025 में इकोलॉजिकल क्षेत्र 681 वर्ग किमी और जोड़ा गया, जिससे कुल क्षेत्रफल 894 वर्ग किमी हो गया।
  • कोर्ट ने पुराने मास्टर प्लान के इकोलॉजिकल क्षेत्र को खत्म करने पर पहले भी फटकार लगाई थी

डमी कार्रवाई से बचाव की कोशिश

  • अफसरों पर आरोप लगने से बचाने के लिए कई बार सिर्फ दिखावटी कार्रवाई की जाती है
  • कुछ दीवारें गिराकर कार्रवाई पूरी दिखा दी जाती है, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में मामला निपट गया दिखे।
  • असल में, अवैध निर्माण को बढ़ावा मिलता रहता है

जिम्मेदारों पर कार्रवाई कैसे हो सकती है?

  • सैटेलाइट इमेज से अवैध निर्माण का पता लगाया जा सकता है
  • जिस समय अवैध निर्माण हुआ, उस समय के अफसरों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है
  • सरकार अगर चाहे तो सख्त कार्रवाई कर सकती है, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ।

जयपुर में खासतौर पर प्रभावित इलाके

  • गोनेर रोड, लूनियावास स्टैंड से खोरी रोपाड़ा मुख्य रोड पर 30 बीघा जमीन पर नई योजना बसा दी गई
  • आगरा रोड, पुरानी चुंगी के पास नई मार्केट बना दी गई
  • इंदिरा गांधी नगर और खातीपुरा स्टेशन के पास भी इकोलॉजिकल क्षेत्र पर निर्माण हो गया
  • यह सिर्फ कुछ उदाहरण हैं, ऐसे कई अन्य मामले भी सामने आए हैं।

इन अफसरों के कार्यकाल में हुआ निर्माण

(जनवरी 2017 से अब तक नगरीय विकास विभाग और स्वायत्त शासन विभाग में रहे अधिकारी)

  • मुकेश कुमार शर्मा
  • पवन कुमार गोयल
  • भास्कर सावंत
  • कुंजीलाल मीणा
  • नवीन महाजन
  • सिद्धार्थ महाजन
  • भवानी सिंह देथा
  • जोगाराम
  • महेश चंद्र शर्मा
  • कैलाशचंद मीणा
  • टी. रविकांत
  • राजेश यादव
  • वैभव गालरिया

निष्कर्ष

राजस्थान के इकोलॉजिकल क्षेत्रों पर अवैध निर्माण लगातार बढ़ रहा है। सरकार और प्रशासन की अनदेखी से हरित क्षेत्र खत्म हो रहे हैं और कंक्रीट के जंगल बढ़ रहे हैं। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्य का पारिस्थितिकी संतुलन प्रभावित हो सकता है

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