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ग्रामीण क्षेत्रों में जरूआ स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति

टीकमगढ़: 12 साल पहले ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए आरोग्यम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जरूआ खोला गया था, लेकिन यहां डॉक्टर और स्टाफ मौजूद नहीं रहते।

स्वास्थ्य केंद्र में ताला, इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है

जरूआ और आसपास के गांवों के लोग छोटी-बड़ी बीमारियों का इलाज कराने के लिए पलेरा, खरगापुर, जतारा और टीकमगढ़ जाने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य केंद्र के ताले अक्सर बंद रहते हैं, जिससे ग्रामीणों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

डॉक्टर और स्टाफ नहीं आते ड्यूटी पर

भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व मंडल अध्यक्ष बबलू यादव ने बताया कि सरकार ने गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र खोले थे, लेकिन यहां तैनात डॉक्टर और कर्मचारी कभी ड्यूटी पर नहीं आते।

✔️ डॉक्टर तेजकरण विश्वकर्मा को मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को जरूआ स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी करनी थी, लेकिन वे नहीं आते।
✔️ स्टाफ नर्स भी उपलब्ध नहीं है।
✔️ कभी-कभी औपचारिकता निभाने के लिए कर्मचारी कुछ समय के लिए स्वास्थ्य केंद्र खोल देते हैं।

ग्रामीणों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई है और तैनात डॉक्टरों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

बीएमओ का बयान

डॉ. संजय अहिरवार (बीएमओ, जतारा) ने कहा:
🗣️ “डॉक्टर तेजकरण विश्वकर्मा जरूआ स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी कर रहे हैं या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। अगर वे ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं, तो कार्रवाई की जाएगी।

🔴 निष्कर्ष: जरूआ स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और स्टाफ की अनुपस्थिति से ग्रामीणों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। अधिकारियों को इस समस्या का समाधान जल्द करना चाहिए ताकि गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं बहाल हो सकें।

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