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जयपुर। राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) के अधिकारियों में पदोन्नति और पदनाम को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। कई अधिकारी जो 6 से 25 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, वे अभी भी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर ही बने हुए हैं। वहीं, सब-इंस्पेक्टर (SI) से पदोन्नत होकर ASP बने अधिकारी वरिष्ठ पदों पर पहुंच गए हैं, जिससे पहले से ASP बने अधिकारी कनिष्ठ के रूप में काम कर रहे हैं।
समस्या क्या है?
🔹 राजस्थान में RPS अधिकारियों की पदोन्नति प्रणाली में विसंगतियां हैं।
🔹 राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण सही पदस्थापन नहीं हो रहा है।
🔹 RPS एसोसिएशन ने सरकार को कई बार समाधान के सुझाव दिए, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
🔹 गृह विभाग की एक समिति ने इस मामले पर दो साल पहले सिफारिश की थी, लेकिन मामला अभी तक अटका हुआ है।
क्या समाधान सुझाया गया है?
✅ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों (ASP) के पदनाम में बदलाव कर उन्हें पुलिस अधीक्षक (SP) बनाया जाए।
✅ मौजूदा SP के पदनाम को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) किया जाए।
✅ इस बदलाव से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
✅ इससे वरिष्ठ RPS अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा।
कई जिलों में वरिष्ठ पदों पर जूनियर अधिकारी तैनात
अजमेर, भरतपुर, करौली, धौलपुर, भिवाड़ी, राजसमंद, सीकर, झुंझुनूं, बीकानेर, हनुमानगढ़ सहित कई जिलों में ASP मुख्यालय के पदों पर जूनियर अधिकारी तैनात हैं, जबकि ये पद सुपर टाइम स्केल अधिकारियों के लिए अधिसूचित हैं। सरकार को इन पदों पर वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति करनी चाहिए।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
पूर्व पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग का कहना है कि अन्य राज्यों में वरिष्ठता के आधार पर पदनाम तय किया जाता है। राजस्थान में भी यही किया जाए तो कानूनी रूप से कोई दिक्कत नहीं आएगी और वरिष्ठ RPS अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा।
निष्कर्ष
राजस्थान पुलिस में RPS अधिकारियों की पदोन्नति और पदनाम को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। सरकार को जल्द से जल्द इस पर ठोस फैसला लेना चाहिए, ताकि पुलिस अधिकारियों का मनोबल बना रहे और प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से चले।
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