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बीकानेर में सरसों और चना की सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई है, जिससे स्थानीय किसानों को बाजार में खुली बोली पर अपनी उपज कम दामों में बेचने का मजबूर सामना करना पड़ रहा है।
खरीद प्रक्रिया में देरी
सरकारी खरीद के लिए जारी निविदा में 59 फर्मों ने भाग लिया था, लेकिन कुछ ठेकेदारों ने हाइकोर्ट में अपील दायर कर दी। कोर्ट के स्टे आने के कारण खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई, जिसके परिणामस्वरूप अन्य जिलों की मंडियों में चना-सरसों के भाव बीकानेर मंडी की तुलना में अधिक हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था की कोशिश
सहकारी समिति रजिस्ट्रार ने प्रस्ताव दिया है कि सहकारी समितियाँ अपने स्तर पर हैंडलिंग और परिवहन की व्यवस्था करें। इन प्रस्तावों को जिला कलक्टर के माध्यम से राजफैड भेजा जाएगा, जिससे खरीद की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके। लेकिन फिलहाल स्थिति में किसानों को अपना माल मंडी में लेकर आना पड़ रहा है और उन्हें खुली बोली में अपने उपज के लिए कम दाम मिल रहे हैं।
किसानों का नुकसान
किसानों के पास उपज के सुरक्षित भंडारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिससे फसल सीधे मंडी में ले जाकर बेचनी पड़ती है। शंभूसिंह राठौड़, बीकानेर के भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष का कहना है कि अगर अधिकारियों ने पहले सतर्क रहकर विधिक राय लेकर काम किया होता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।
मौजूदा सरकारी खरीद की शुरुआत
हालांकि पिछले दिनों श्रीगंगानगर अनाज मंडी में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चना और सरसों की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद की शुरुआत की थी, परंतु बीकानेर मंडी में प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। इससे किसान अपनी उपज को बाजार में खुली बोली पर बेचकर नुकसान उठा रहे हैं।
👉 निष्कर्ष:
सरकारी खरीद प्रक्रिया में देरी और नियमानुसार कार्रवाई न होने की वजह से, बीकानेर के किसान अपनी उपज कम दाम पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा इस मामले पर तुरंत ध्यान नहीं देने से किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
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