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खंडवा। मुरैना अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर के पास लगी आग की घटना के बाद खंडवा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में फायर सुरक्षा को लेकर एक बार फिर हलचल शुरू हुई। लेकिन सच्चाई यह है कि अस्पताल में आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम अब तक नहीं हो पाए हैं।
चार साल पहले अस्पताल के ए और बी ब्लॉक में लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से फिक्सड फायर फाइटिंग सिस्टम लगाया गया था, लेकिन आज तक वह चालू नहीं हो सका। इतने लंबे समय में इस सिस्टम के 36 लाख रुपये के उपकरण चोरी भी हो गए। इसके बावजूद अस्पताल के पास फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) नहीं है, फिर भी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं।
बिना सुरक्षा के इलाज, हर रोज हजारों मरीज खतरे में
अस्पताल में हर दिन करीब 1200 से 1500 मरीज इलाज के लिए आते हैं। साथ ही भवन में हमेशा करीब 2 से 2.5 हजार लोग (मरीज, स्टाफ, और अन्य कर्मचारी) मौजूद रहते हैं। लेकिन अस्पताल में दिखावे के कुछ फायर उपकरण ही लगे हैं, जबकि वास्तविक आग लगने पर उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल होगा।
चोरी हुए फायर उपकरण, केस दर्ज कर इतिश्री
सितंबर 2022 में फायर हाईड्रेंट से पाइप और नोजल चोरी हो गए थे। इन उपकरणों के बिना आग बुझाना असंभव है। पुलिस केस दर्ज कर लिया गया, लेकिन इसके बाद कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया।
एसएनसीयू में फायर एक्जिट तक नहीं
बच्चों की यूनिट (एसएनसीयू) और पीआईसीयू जैसे विभागों में केवल एक ही गेट है। यदि यहां आग लगती है तो लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। 26 लाख रुपये की लागत से फायर एक्जिट बनाने का प्रस्ताव तो है, लेकिन अब तक वह भी कागजों में ही अटका है।
पुराने भवन में भी अधूरा है फायर सिस्टम
जिला अस्पताल के पुराने भवन में दो साल पहले फायर सिस्टम का काम शुरू हुआ था, लेकिन आज तक वह पूरा नहीं हो सका। केवल पाइपलाइन बिछाई गई है, बाकी काम अधूरा है।
जिम्मेदारों की सफाई
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डॉ. रंजीत बडोले, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज:
“फायर सिस्टम सुधारने के लिए पीडब्ल्यूडी को प्रस्ताव भेजा है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद फायर एनओसी ली जाएगी।” -
डॉ. अनिरुद्ध कौशल, सिविल सर्जन:
“भोपाल से फायर सिस्टम का कार्य चल रहा है। फिलहाल अग्निशमन यंत्र पर्याप्त मात्रा में हैं और स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है। एसएनसीयू में फायर एक्जिट के लिए पत्र भेजा है।”
निष्कर्ष:
चार साल में भी फायर सिस्टम चालू नहीं होना और सुरक्षा के उपकरणों की चोरी, खंडवा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की लापरवाही को दर्शाता है। यह सीधे मरीजों और स्टाफ की जान को खतरे में डाल रहा है। मामले में जल्द ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है।
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