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तमिलनाडु के मदुरै में स्थित कलैंजर शताब्दी पुस्तकालय आधुनिक तकनीक से सुसज्जित एक अनोखा पुस्तकालय है, जिसे राज्य की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाया गया है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने अपने पूर्व मुख्यमंत्री और पिता करुणानिधि की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में इस पुस्तकालय की शुरुआत की थी। इसकी लागत लगभग 206 करोड़ रुपये रही और इसका उद्घाटन 15 जुलाई 2023 को किया गया।
विशाल इमारत, लाखों किताबें
यह पुस्तकालय छह मंजिलों में फैला हुआ है और इसका कुल क्षेत्रफल 2.13 लाख वर्गफुट है। यहां लगभग 3.5 लाख किताबें मौजूद हैं, जिनमें से 1 लाख तमिल और 2.3 लाख अंग्रेजी भाषा की हैं। पुस्तकालय में आगे चलकर 5 लाख पुस्तकों का संग्रह किया जाएगा।
बच्चों और विशेष जनों के लिए विशेष सुविधाएं
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बच्चों के लिए अलग सेक्शन: रंग-बिरंगी सीटें, तमिल-अंग्रेजी वर्णमाला से सजे हॉल, योग और कला की कार्यशालाएं।
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विकलांगों के लिए ग्राउंड फ्लोर: विशेष प्रवेश द्वार और सुविधाएं।
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नेत्रहीनों के लिए ऑडियो किताबें भी तैयार की जाती हैं।
विज्ञान और तकनीक का संगम
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विज्ञान पार्क में लाइट सिमुलेटर, मानव शरीर की जानकारी देने वाला टच स्क्रीन, ग्रहों पर वजन नापने वाला स्केल और अनंत अंतरिक्ष की झलक जैसी आकर्षक चीजें हैं।
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होलोग्राम आधारित रियलिटी, डिजिटल थियेटर और हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधाएं भी मौजूद हैं।
शोधार्थियों के लिए वरदान
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प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए संदर्भ पुस्तकें और लंबा हॉल।
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दुर्लभ पुस्तकों का डिजिटलीकरण, मल्टीमीडिया हॉल और वीडियो स्टूडियो।
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तमिल और अंग्रेजी साहित्य की बड़ी रेंज और अनुवाद की सुविधा।
साहित्य और समाज से जुड़ाव
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हर पूर्णिमा को ‘नील ओलियल’ नामक साहित्यिक कार्यक्रम होता है।
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युवाओं के लिए कार्यशालाएं और संगोष्ठियां ‘सिगरम तोड़ू’ कार्यक्रम के तहत होती हैं।
विशेषज्ञों की राय
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प्रो. के. कविता ने इसे शोधार्थियों के लिए वरदान बताया है, खासतौर पर तमिल साहित्य के लिए।
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शोधार्थी निवेदिता के अनुसार यहां अंग्रेजी साहित्य की भी अच्छी किताबें हैं और विषय की गहराई से समझ पाने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष:
यह पुस्तकालय सिर्फ किताबों का भंडार नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा ज्ञान केंद्र है जो आधुनिकता और सांस्कृतिक विरासत के बीच सेतु का काम करता है।
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