इस्तांबुल: तुर्किये में रूस और यूक्रेन के बीच हुई बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता महज दो घंटे से भी कम समय में समाप्त हो गई। यह वार्ता तीन साल बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त करने की दिशा में एक प्रयास थी, लेकिन उम्मीद के अनुरूप कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।
रूसी मांगें बनीं रुकावट
यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वार्ता के विफल रहने का कारण रूस की “अस्वीकार्य” मांगों को बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि रूसी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत की शुरुआत में ही ऐसे प्रस्ताव रखे जिन पर पूर्व में कोई चर्चा नहीं हुई थी। इनमें यूक्रेनी सैनिकों को उनके नियंत्रण वाले अहम इलाकों से पीछे हटने की मांग भी शामिल थी।
यूक्रेनी अधिकारी ने कहा, “ऐसा प्रतीत हुआ कि रूसी पक्ष की मंशा केवल वार्ता को बाधित करने की थी, न कि समाधान खोजने की।”
यूक्रेन का रुख स्पष्ट
यूक्रेन ने दोहराया कि वह एक तात्कालिक संघर्ष विराम और टिकाऊ कूटनीतिक समाधान की दिशा में काम करना चाहता है, जैसा कि अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भी सुझाया है। यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव ने किया, जबकि रूस की ओर से वार्ता का नेतृत्व राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी व्लादिमीर मेडिंस्की ने किया।
तुर्किये की भूमिका और वार्ता का स्वरूप
तुर्किये के विदेश मंत्री हकान फिदान ने बैठक के आरंभ में दोनों पक्षों से शांति के इस अवसर का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान किया था। बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधि यू-आकार की मेज पर आमने-सामने बैठे थे। तुर्किये ने इस वार्ता को एक ‘संभावना की खिड़की’ बताया, लेकिन जानकारों का मानना है कि हालात को देखते हुए निकट भविष्य में कोई बड़ा समाधान निकलना मुश्किल है।
क्या आगे बढ़ेगी वार्ता?
हालांकि यह बातचीत बिना किसी ठोस परिणाम के खत्म हो गई, लेकिन तुर्किये और अन्य मध्यस्थ देश कोशिश कर रहे हैं कि बातचीत का सिलसिला टूटे नहीं। दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और सैन्य तनाव के कारण शांति की राह बेहद कठिन दिख रही है।
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