नेपाल की राजधानी काठमांडू में राजशाही और हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर तेज हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर सरकार ने दो महीने के लिए सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब राजशाही समर्थकों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया है और देश को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं।
तीन इलाकों को मिली छूट, बाकी क्षेत्रों में पाबंदी
काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राजधानी के रिंग रोड क्षेत्र में केवल कोटेश्वर, बल्खू और सिफाल मैदान को विरोध के लिए अनुमति दी गई है। इसके अलावा शेष क्षेत्रों में धरना, प्रदर्शन, जनसभा, जुलूस और अन्य सार्वजनिक आयोजन 2 जून से अगले दो महीने तक पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। प्रशासन ने यह कदम व्यापार और यातायात व्यवस्था में संभावित बाधाओं को देखते हुए उठाया है।
कमल थापा सहित कई नेता हिरासत में, फिर रिहा
प्रदर्शनकारियों के तेज तेवर को देखते हुए रविवार को पूर्व गृहमंत्री और राजशाही समर्थक नेता कमल थापा सहित सात लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। वे प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
पूर्व राजा की तस्वीरें, सरकार के खिलाफ नारे
राजशाही समर्थकों का यह आंदोलन गुरुवार से शुरू हुआ, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की तस्वीरें लहराईं और मौजूदा प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारी कह रहे हैं कि जब तक नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र और राजशाही व्यवस्था में नहीं लाया जाता, तब तक वे विरोध जारी रखेंगे।
नारायण चौर में भिड़ंत, पुलिस से झड़प
आंदोलन के चौथे दिन नारायण चौर इलाके में भारी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने जुटकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर प्रधानमंत्री निवास बलुवाटर की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस के साथ झड़प हो गई। विरोध की अगुवाई राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) और आरपीपी नेपाल कर रहे हैं, जिनके नेता राजेंद्र लिंगडेन राजशाही के प्रबल समर्थक माने जाते हैं।
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