गाजा की तरफ राहत सामग्री लेकर रवाना हुई ग्रेटा थनबर्ग और उनके साथियों की नाव को इजरायली सेना ने समुद्र में ही घेरकर रोक दिया। पर्यावरण और मानवाधिकारों की चर्चित कार्यकर्ता ग्रेटा इस अभियान के जरिए गाजा के लोगों के लिए जीवनरक्षक सामान पहुंचाने की कोशिश कर रही थीं। इस बोट में कुल 13 लोग सवार थे, जिनमें ग्रेटा और अंतरराष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक टीम शामिल थी।
इजरायली नौसेना ने घेरा, नाव को लिया कब्जे में
इजरायली सुरक्षा बलों ने सोमवार सुबह गाजा की ओर बढ़ रही बोट को समुद्र में रोक लिया।
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नाव पर मौजूद सभी लोगों को हिरासत में लिया गया, हालांकि कोई हिंसा की जानकारी सामने नहीं आई है।
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ग्रेटा और अन्य कार्यकर्ताओं ने इजरायली नावों के करीब आते ही इमरजेंसी प्रोटोकॉल के तहत लाइफ जैकेट पहन लिए थे।
इजरायली सेना का कहना है कि यह क्षेत्र “सुरक्षा प्रतिबंधित क्षेत्र” है, जहां किसी भी गैर-अनुमोदित वाहन को घुसने की अनुमति नहीं है।
ग्रेटा ने वीडियो संदेश में मांगी मदद
बोट के रोके जाने से कुछ समय पहले ग्रेटा थनबर्ग ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपील जारी की थी:
“हमें गाजा के लोगों की मदद करने से रोका जा रहा है। हमें बंधक बनाया जा रहा है। दुनिया को हमारी आवाज़ सुननी चाहिए।”
उन्होंने मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की थी।
सिसिली से रवाना हुई थी मानवीय सहायता
ग्रेटा और उनकी टीम 1 जून को इटली के सिसिली द्वीप से रवाना हुई थी।
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उनके साथियों में विभिन्न देशों से आए सामाजिक कार्यकर्ता और डॉक्टर्स भी शामिल थे।
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इस नाव में दवाएं, बच्चों के लिए दूध, खाद्य सामग्री, डाइपर और वाटर प्यूरीफायर लदे हुए थे।
ग्रेटा ने रवाना होने से पहले एक बयान में कहा था:
“यदि आज भी हमारे अंदर इंसानियत बाकी है, तो फिलिस्तीन के लिए खड़े होना हमारा कर्तव्य है।”
इजरायल की पहले से चेतावनी
इस मिशन से पहले इजरायली अधिकारियों ने ग्रेटा और उनकी टीम को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि गाजा की ओर किसी भी जहाज को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
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इजरायल ने यह भी कहा था कि “सुरक्षा कारणों” से ऐसे किसी प्रयास को बलपूर्वक रोका जाएगा।
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ग्रेटा की टीम ने कई मानवाधिकार संगठनों से सहयोग मांगा था, लेकिन कार्रवाई उससे पहले ही हो गई।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
घटना के बाद कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इजरायल की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
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एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
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संयुक्त राष्ट्र में भी इस विषय पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है।
निष्कर्ष
ग्रेटा थनबर्ग का यह कदम गाजा के संघर्षरत नागरिकों तक राहत पहुंचाने की एक मानवीय कोशिश थी, जिसे सुरक्षा और राजनीतिक वजहों से रोका गया। यह मामला ना केवल इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के मानवीय पहलू को उजागर करता है, बल्कि वैश्विक मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
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