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उदयपुर:
आरएनटी मेडिकल कॉलेज के दिलशाद हॉस्टल में डॉ. रवि शर्मा की मौत के बाद से रेजिडेंट डॉक्टर्स पिछले 5 दिनों से हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल से एमबी चिकित्सालय समेत सभी 6 सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हो गई हैं।
🔴 इलाज के लिए लंबी लाइनें, लेकिन नहीं मिल रहा इलाज
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मरीजों को 4 से 5 घंटे लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, फिर भी इलाज नहीं मिल रहा।
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अब तक 450 से ज्यादा ऑपरेशन टाले जा चुके हैं।
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कई मरीज तो बिना इलाज कराए लौट रहे हैं या अस्पताल आने से बच रहे हैं।
🔴 रेजिडेंट्स की मांग और प्रदर्शन
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रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रवि की मौत की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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सोमवार को भी रेजिडेंट्स ने अस्पताल परिसर में रैली और नारेबाजी की।
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हड़ताल का असर राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी दिखा, जहां 2 घंटे की सांकेतिक हड़ताल हुई।
🔴 सिर्फ 150 फैकल्टी डॉक्टरों के भरोसे अस्पताल
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आरएनटी मेडिकल कॉलेज में करीब 800 रेजिडेंट डॉक्टर हैं, जो रोजाना एमबी अस्पताल, जनाना, बाल चिकित्सालय और अन्य अस्पतालों में सेवाएं देते हैं।
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फिलहाल सिर्फ 150 फैकल्टी डॉक्टर ही ओपीडी और आईपीडी संभाल रहे हैं।
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इमरजेंसी और आईसीयू में हालत और भी ज्यादा खराब हैं। नर्सिंग स्टाफ और कुछ सीनियर डॉक्टर ही काम चला रहे हैं।
🔴 ओपीडी में गिरावट, मरीजों की परेशानी
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पहले जहां रोजाना 6500 से 7000 मरीज ओपीडी में आते थे, अब यह संख्या 4500 से 5000 के बीच रह गई है।
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मरीज घंटों लाइन में खड़े रहते हैं और नंबर नहीं आने पर मायूस होकर लौट जाते हैं।
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कई बार डॉक्टर बिना ठीक से सुने ही दवा लिखकर भेज देते हैं।
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एक्स-रे, ब्लड टेस्ट और अन्य छोटी जांचें भी टाल दी जा रही हैं।
🔴 सोमवार को अस्पताल का हाल
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4857 मरीज ओपीडी में पहुंचे।
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इनमें से 218 मरीजों को भर्ती किया गया।
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37 इमरजेंसी ऑपरेशन किए गए।
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कई मरीज पर्ची पर लिखी सिर्फ पेनकिलर देखकर ही दवा लिए बिना लौट गए।
निष्कर्ष:
रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों की मांगें जायज़ हो सकती हैं, लेकिन इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।
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