वॉशिंगटन/नई दिल्ली:
भारतीय वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष से अपने देशवासियों को एक भावुक संदेश भेजा है। गुरुवार शाम 4:30 बजे भारतीय समयानुसार जब उनका यान अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से जुड़ने वाला था, तब उन्होंने कहा कि यह मिशन न सिर्फ तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि भारत के सपनों और महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक भी है।
“मैं यह यात्रा अकेले नहीं कर रहा…”
स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल से संदेश भेजते हुए शुक्ला ने हिंदी में कहा:
“इस समय मैं अंतरिक्ष में बेहद उत्साहित और गर्वित महसूस कर रहा हूं। जब हम लॉन्च हो रहे थे, तब मेरे स्पेससूट के कंधे पर लगा तिरंगा मुझे यह याद दिला रहा था कि मैं यह यात्रा अकेले नहीं कर रहा, बल्कि आप सब मेरे साथ हैं।”
गगनयान की दिशा में एक ठोस कदम
इस मिशन को भारत के गगनयान कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो 2027 में भारत का पहला मानवयुक्त मिशन अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है।
“यह अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक मेरी यात्रा की शुरुआत है। कुछ ही घंटों में हम ISS से डॉक करेंगे और वहां रहना शुरू करेंगे। यह एक मजबूत और स्थिर कदम है उस दिशा में जिसमें हम गगनयान जैसे मिशनों के माध्यम से आगे बढ़ रहे हैं,” शुक्ला ने कहा।
देशवासियों से जुड़ने की अपील
शुक्ला ने देशवासियों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनें और इसे अपनी उपलब्धि मानें।
“यह सिर्फ हमारी तकनीकी प्रगति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि हम एक देश के रूप में किस ओर बढ़ना चाहते हैं — हमारे सपने क्या हैं, हमारी उम्मीदें क्या हैं।”
यात्रा का दस्तावेज़ीकरण करेंगे
उन्होंने यह भी बताया कि ISS पर अपने 14 दिन के प्रवास के दौरान वे अपने अनुभवों को वीडियो और तस्वीरों के जरिए रिकॉर्ड करेंगे और उसे पूरे देश और दुनिया के साथ साझा करेंगे।
“मैं चाहता हूं कि आप मेरी आंखों से इस यात्रा को देखें और इसका हिस्सा बनें।”
1984 के बाद एक ऐतिहासिक क्षण
शुभांशु शुक्ला ने इस मिशन के जरिए इतिहास रच दिया है — वह अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने वाले पहले भारतीय और राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय नागरिक बन गए हैं।
राकेश शर्मा ने 1984 में एक संयुक्त भारत-सोवियत मिशन के तहत अंतरिक्ष की यात्रा की थी।
ISRO के लिए उम्मीद की उड़ान
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इस मिशन को एक प्रेरक उपलब्धि और गगनयान की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखता है। भारत के अंतरिक्ष अभियानों में यह पल एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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