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दलहन उत्पादन में राजस्थान तीसरे नंबर पर, लेकिन स्टार्टअप में पीछे – महाराष्ट्र और गुजरात ले रहे फायदा

राजस्थान। राजस्थान देश में दलहन (दालों) के उत्पादन में तीसरे नंबर पर है, लेकिन अफसोस की बात है कि यहां दाल से जुड़े स्टार्टअप और उद्योग अभी भी सुस्त हैं। जबकि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्य न सिर्फ दालों का बड़ा मार्केट बना चुके हैं, बल्कि वहां के कारखाने राजस्थान की मूंग, मोठ और मसूर से बने उत्पादों को भी प्रोसेस कर रहे हैं।

राजस्थान की दालें, लेकिन फायदा दूसरों को

राजस्थान खासतौर पर मूंग, मोठ, मसूर और उड़द जैसी दालों का प्रमुख उत्पादक है। खासकर पश्चिमी राजस्थान और कोटा क्षेत्र में इनकी खेती बड़े पैमाने पर होती है। फिर भी यहां दाल प्रोसेसिंग यूनिट्स और स्टार्टअप की कमी है। इसके चलते यहां की उपज महाराष्ट्र और गुजरात में भेजी जा रही है, जहां इनका प्रोसेसिंग कर बाजार में बेचा जाता है।

देश में दलहन उत्पादन – 2024-25 (लाख टन में)

राज्य उत्पादन (लाख टन)
मध्यप्रदेश 54.09
महाराष्ट्र 50.35
राजस्थान 38.75
उत्तरप्रदेश 23.32
गुजरात 19.36

देश का कुल दलहन उत्पादन: 252.38 लाख टन

क्यों पिछड़ रहा है राजस्थान?

राजस्थान में जलवायु और भूमि दालों की खेती के लिए अनुकूल है। बावजूद इसके यहां दाल आधारित स्टार्टअप और उद्योगों की कमी है। इसकी प्रमुख वजहें हैं:

  • प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी

  • निवेश में रुचि की कमी

  • तकनीकी और मार्केटिंग सपोर्ट का अभाव

  • किसानों में जागरूकता की कमी

केंद्र सरकार का आत्मनिर्भर मिशन

केंद्र सरकार ने 2025-26 के बजट में तुअर, उड़द और मसूर जैसे दलहनों पर खास ध्यान देते हुए 6 साल का आत्मनिर्भरता मिशन शुरू किया है। इसके तहत:

  • बेहतर बीज उपलब्ध कराना

  • जलवायु पर अनुसंधान

  • समर्थन मूल्य देना

  • स्टार्टअप को बढ़ावा देना

  • आयात-निर्यात नीति को किसान अनुकूल बनाना

गुजरात-महाराष्ट्र में तैयार हो रहा बड़ा बाजार

राजस्थान की उपज होने के बावजूद दालों से जुड़ा बड़ा कारोबार गुजरात और महाराष्ट्र में हो रहा है। वहां न केवल प्रोसेसिंग यूनिट्स हैं, बल्कि दाल से बने अन्य उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं।


निष्कर्ष:

राजस्थान के पास दलहन उत्पादन में आगे रहने की क्षमता है, लेकिन इस लाभ को बनाए रखने और किसानों को अधिक मुनाफा दिलाने के लिए जरूरी है कि यहां दलहन आधारित स्टार्टअप और उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए। इससे रोजगार भी बढ़ेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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