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एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान को लेकर सियासी दलों की सक्रियता पर सवाल उठने लगे हैं। दूसरे चरण में जहां राजनीतिक दल प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग के आंकड़े उनकी निष्क्रियता दिखा रहे हैं।
बाराबंकी में एक भी दावा-आपत्ति नहीं
उदाहरण के तौर पर यूपी के बाराबंकी में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) ने अब तक एक भी फॉर्म-6 (नया पंजीकरण) या फॉर्म-7 (दावा-आपत्ति) जमा नहीं किया है। यह तब है, जब यहां सभी दलों के हजारों BLA तैनात हैं।
अवध क्षेत्र में भी यही हाल
अवध क्षेत्र के ज्यादातर जिलों में भी यही स्थिति दिख रही है। पहले चरण में प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर करीब 2.89 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हुए थे। इतनी बड़ी संख्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुरुआती दौर में चिंता भी जताई थी।
BLA की संख्या ज्यादा, काम शून्य
प्रदेश में SIR के लिए:
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BJP: 1,56,015 BLA
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समाजवादी पार्टी: 1,12,309 BLA
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BSP: 1,00,169 BLA
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कांग्रेस: 16,538 BLA
इसके बावजूद, कई जगहों पर मतदाता सूची को लेकर दलों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं दिख रही।
बाराबंकी में आंकड़े क्या कहते हैं
बाराबंकी की 6 विधानसभा सीटों में कुल 10,063 BLA नियुक्त हैं। इनमें:
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समाजवादी पार्टी के 2,631 BLA
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भाजपा के 2,595 BLA
फिर भी किसी दल ने न तो नया पंजीकरण कराया और न ही दावा-आपत्ति दर्ज की।
प्रशासन का बयान
अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह ने कहा,
“एसआईआर में किसी भी राजनीतिक दल के BLA ने अभी तक न फॉर्म-6 दिया है और न फॉर्म-7। जो भी दावे-आपत्तियां आ रही हैं, वे सीधे मतदाताओं की ओर से हैं। सभी मामलों की जांच कर निस्तारण किया जाएगा।”
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, बयानों में आक्रामक और जमीन पर निष्क्रिय रवैये ने SIR में सियासी दलों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोग के आंकड़े बता रहे हैं कि ‘लुकाछिपी’ का खेल जारी है, जबकि जिम्मेदारी निभाने की जरूरत सबसे ज्यादा है।
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