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बिहार में अगले महीने पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 5 मार्च है। विधानसभा की संख्या के आधार पर चार सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है।
चिराग के बयान से बदला माहौल
लोजपा (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने साफ कहा है कि उनकी मां रीना पासवान की राजनीति में खास रुचि नहीं है और वे राज्यसभा नहीं जाएंगी।
इस बयान से राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को राहत मिली है, क्योंकि इस सीट पर उनकी दावेदारी मानी जा रही थी।
हालांकि, जीतन राम मांझी की चुप्पी अभी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
उपेंद्र कुशवाहा की दावेदारी मजबूत
सूत्रों के अनुसार, भाजपा अपने कोटे से एक सीट पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को राज्यसभा भेज सकती है। दूसरी सीट सहयोगी दल के लिए छोड़ी जा सकती है, जहां उपेंद्र कुशवाहा का नाम आगे है।
कुशवाहा का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। वे लोकसभा चुनाव 2024 में हारने के बाद भाजपा-जेडीयू के सहयोग से राज्यसभा पहुंचे थे। अब दोबारा उन्हें भेजने की चर्चा है।
विधानसभा में संख्या बल
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है।
विपक्ष के पास कुल 35 विधायक हैं —
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आरजेडी: 25
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कांग्रेस: 6
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लेफ्ट: 9
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आईआईपी: 1
उन्हें जीत के लिए अतिरिक्त समर्थन चाहिए। AIMIM ने अपना उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
पांचवीं सीट पर टिकी नजर
अगर विपक्ष उम्मीदवार नहीं उतारता, तो एनडीए सभी पांच सीटें जीत सकती है।
लेकिन अगर तेजस्वी यादव उम्मीदवार उतारते हैं, तो चुनाव रोचक हो सकता है।
फिलहाल चार सीटों पर एनडीए की स्थिति मजबूत है, जबकि पांचवीं सीट पर अंतिम रणनीति और समर्थन पर सबकी नजर है।
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