कैलादेवी चैत्र नवरात्र लक्खी मेले के लिए श्रद्धालुओं की पदयात्रा शुरू हो चुकी है। शुक्रवार से भंडारे भी शुरू होने वाले हैं, लेकिन इस बार आयोजकों के सामने सबसे बड़ी समस्या रसोई गैस सिलेंडर की कमी बन गई है।
गैस नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
मेले में लगने वाले भंडारों के लिए गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। गैस एजेंसियों पर कॉमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं और घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति भी मांग के मुकाबले लगभग आधी ही हो रही है।
इस वजह से आम लोगों के साथ-साथ भंडारा समितियों को भी गैस सिलेंडर मिलने में कठिनाई हो रही है।
लकड़ी की भट्टियों का लिया सहारा
गैस की कमी के कारण अब भंडारा समितियों ने लकड़ी की भट्टियों पर भोजन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए समितियां लकड़ियों का इंतजाम कर रही हैं।
राम मंदिर परिसर में गुरुवार से ही लकड़ी की भट्टियों पर प्रसादी बनाना शुरू कर दिया गया।
हजारों श्रद्धालुओं के भोजन की जिम्मेदारी
आयोजकों के अनुसार हर भंडारे में रोजाना 5 से 7 हजार श्रद्धालु भोजन करते हैं। ऐसे में भोजन की व्यवस्था सही रखना बड़ी जिम्मेदारी है।
भंडारा समितियों ने प्रशासन से मांग की है कि मेले के दौरान गैस सिलेंडरों की पर्याप्त आपूर्ति करवाई जाए ताकि श्रद्धालुओं को भोजन में कोई परेशानी न हो।
भंडारों में लगते हैं सैकड़ों सिलेंडर
हिण्डौन क्षेत्र में लगने वाले सभी भंडारों में मिलाकर करीब 700 गैस सिलेंडर की जरूरत पड़ती है।
बयाना मार्ग पर लगने वाले एक भंडारे में ही तीन दिन में लगभग 90 से 100 सिलेंडर खर्च हो जाते हैं। पहले स्थानीय गैस एजेंसियां इनकी आपूर्ति करती थीं, लेकिन इस बार गैस की कमी के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।
रोटी मशीन हटाकर लगाए तंदूर
कुछ भंडारा समितियों ने गैस और बिजली से चलने वाली रोटी मशीनें वापस कर दी हैं। अब उनकी जगह 12 से 15 तंदूर लगाए जा रहे हैं, जिनमें श्रद्धालुओं के लिए तंदूरी रोटियां बनाई जाएंगी। सब्जी और अन्य पकवान बनाने के लिए लकड़ी की भट्टियां तैयार की गई हैं।
सिलेंडर बुकिंग में भी दिक्कत
दूसरी ओर गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए सर्वर भी कई जगह बंद रहा, जिससे लोग सिलेंडर बुक नहीं कर पाए। लोग एजेंसी कार्यालय और गोदाम के चक्कर लगाते रहे।
कुछ एजेंसियों ने जरूरतमंद उपभोक्ताओं को मैन्युअल बुकिंग के आधार पर सिलेंडर देकर राहत देने की कोशिश की।
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