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राजा भोज से हाईकोर्ट तक… भोजशाला विवाद की 100 साल पुरानी कहानी
आंदोलन में महिलाओं ने भी खाईं लाठियां, 95 साल के बुजुर्ग ने सुनाए संघर्ष के किस्से
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद एक बार फिर चर्चा में है। करीब 100 साल पुराने इस विवाद ने इतिहास, आस्था और कानून के बीच लंबी लड़ाई देखी है। राजा भोज से जुड़ी इस ऐतिहासिक धरोहर को लेकर दशकों से विवाद चलता आ रहा है, जो अब हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।
स्थानीय लोगों और आंदोलन से जुड़े बुजुर्गों का कहना है कि भोजशाला केवल एक इमारत नहीं, बल्कि आस्था और इतिहास का प्रतीक है। 95 साल के एक बुजुर्ग आंदोलनकारी ने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि इस आंदोलन में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कई बार पुलिस की लाठियां भी झेलीं।

उन्होंने कहा कि वर्षों तक लोग भोजशाला में पूजा-अर्चना और अधिकारों को लेकर संघर्ष करते रहे। कई बार विरोध प्रदर्शन हुए, गिरफ्तारियां हुईं और प्रशासन के साथ टकराव भी देखने को मिला।
भोजशाला को हिंदू पक्ष मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसी को लेकर लंबे समय से कानूनी और सामाजिक विवाद जारी है।
फिलहाल मामले पर अदालत में सुनवाई चल रही है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं। भोजशाला का मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति और सामाजिक चर्चा में लगातार अहम बना हुआ है।
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