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CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
9वीं क्लास में लागू करने का विरोध, जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच करेगी सुनवाई
channel_009 | एजुकेशन & लीगल अपडेट
CBSE की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। कई अभिभावकों ने इस नीति को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दाखिल की है। पेरेंट्स का कहना है कि 9वीं कक्षा से इस पॉलिसी को लागू करना छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव बढ़ा सकता है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, अचानक नई भाषा व्यवस्था लागू करने से छात्रों की पढ़ाई और मानसिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि स्कूलों में पहले से ही सिलेबस और प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव है, ऐसे में अतिरिक्त भाषा अनिवार्य करना व्यावहारिक नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच करेगी। माना जा रहा है कि कोर्ट इस दौरान शिक्षा नीति, छात्रों के हित और राज्यों की भाषाई संवेदनशीलता जैसे मुद्दों पर भी विचार कर सकता है।
वहीं, नीति के समर्थकों का कहना है कि थ्री-लैंग्वेज सिस्टम छात्रों को बहुभाषी और राष्ट्रीय स्तर पर अधिक सक्षम बनाने में मदद करेगा। उनका दावा है कि नई शिक्षा नीति के तहत भाषा सीखने पर जोर भविष्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे शिक्षा सुधार बता रहे हैं, जबकि कई अभिभावक इसे छात्रों पर “अतिरिक्त बोझ” करार दे रहे हैं।
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, क्योंकि इस फैसले का असर देशभर के लाखों CBSE छात्रों और स्कूलों पर पड़ सकता है।
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