तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट पर चीन-बांग्लादेश की बातचीत से भारत अलर्ट, ‘चिकन नेक’ को लेकर बढ़ी चिंता
channel_009 | International News
तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट को लेकर चीन और बांग्लादेश के बीच बातचीत ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। यह प्रोजेक्ट सिर्फ नदी और जल प्रबंधन से जुड़ा मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके रणनीतिक असर को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। खासकर भारत के संवेदनशील ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क बताई जा रही हैं।
चिकन नेक, यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर, भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण इलाका है। यह संकरा भू-भाग पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। ऐसे में इस क्षेत्र के पास किसी बाहरी ताकत की बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए सुरक्षा और रणनीति दोनों लिहाज से अहम मुद्दा बन जाती है।
तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश लंबे समय से तीस्ता जल बंटवारे और नदी प्रबंधन को लेकर समाधान चाहता रहा है। अब अगर चीन इस प्रोजेक्ट में निवेश या तकनीकी सहयोग के जरिए भूमिका बढ़ाता है, तो भारत इसे सिर्फ विकास परियोजना के रूप में नहीं देखेगा।
भारत की चिंता यह भी है कि चीन पहले से दक्षिण एशिया में कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करता रहा है। श्रीलंका, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों में चीन की मौजूदगी के बाद अब बांग्लादेश में तीस्ता प्रोजेक्ट पर उसकी सक्रियता भारत के लिए रणनीतिक अलर्ट बन सकती है।
हालांकि बांग्लादेश अपनी जरूरतों और विकास हितों के आधार पर फैसले लेता है, लेकिन भारत के लिए यह जरूरी होगा कि वह ढाका के साथ बातचीत को मजबूत रखे। जल बंटवारा, सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन—तीनों मुद्दों पर भारत को कूटनीतिक रूप से सक्रिय रहना होगा।
channel_009 निष्कर्ष:
तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट पर चीन-बांग्लादेश बातचीत भारत के लिए सिर्फ जल विवाद नहीं, बल्कि रणनीतिक चिंता का विषय है। चिकन नेक के पास चीन की किसी भी संभावित भूमिका को भारत सुरक्षा के नजरिए से गंभीरता से देखेगा।
Audience Question:
क्या भारत को तीस्ता प्रोजेक्ट पर बांग्लादेश के साथ अपनी कूटनीतिक बातचीत और तेज करनी चाहिए? कमेंट में अपनी राय बताइए।
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