ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब नौवें दिन में प्रवेश कर चुकी है, और दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है। जहां इजरायल इसे आत्मरक्षा की कार्रवाई बता रहा है, वहीं ईरान इसे एकतरफा आक्रामकता और जबरन थोपे गए युद्ध की संज्ञा दे रहा है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने जोरदार बयान देते हुए कहा कि यह संघर्ष अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है और इसके लिए इजरायल पूरी तरह से जिम्मेदार है।
“हम शांति की ओर बढ़ रहे थे, इन्होंने जंग छेड़ दी”
अरागची ने कहा कि यह हमला ऐसे समय में हुआ जब ईरान अमेरिका के साथ एक शांतिपूर्ण समझौते की दिशा में गंभीर बातचीत की तैयारी कर रहा था। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या यही है उन देशों की नीयत जो खुद को मानवाधिकारों का पैरोकार बताते हैं?”
उनका कहना था कि इजरायल का हमला सिर्फ सैन्य ठिकानों पर सीमित नहीं रहा, बल्कि रिहायशी इलाकों, अस्पतालों और विश्वविद्यालयों जैसे नागरिक ढांचे को भी निशाना बनाया गया। इसमें सैकड़ों निर्दोष नागरिकों की मौत हुई है।
“यह सिर्फ जंग नहीं, मानवता पर हमला है”
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि इजरायल की यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है, जो किसी भी देश को दूसरे की संप्रभुता के खिलाफ बल प्रयोग करने से रोकता है।
उन्होंने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की कि वह चुप्पी तोड़े और नैतिक जिम्मेदारी निभाए।
IAEA की निगरानी में थे ईरान के परमाणु केंद्र
अरागची ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया, वे IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) की निगरानी में थे और पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए उपयोग किए जा रहे थे।
उन्होंने चेताया कि ऐसे ठिकानों पर हमले से न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होता है, बल्कि इससे रेडियोधर्मी रिसाव जैसी गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य आपदाएं भी सामने आ सकती हैं।
“यह लड़ाई दो देशों तक सीमित नहीं रहेगी”
ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि यह संघर्ष अब केवल ईरान और इजरायल के बीच नहीं रहेगा।
अरागची ने आगाह किया कि यदि विश्व समुदाय ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह युद्ध पूरे मिडिल ईस्ट और उससे आगे तक फैल सकता है। यह वैश्विक कानून, न्याय और मानवता की नींव को हिला सकता है।
निष्कर्ष: क्या दुनिया तटस्थ रह पाएगी?
अब्बास अरागची के इस भाषण ने एक बार फिर ये स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट है। सवाल यह नहीं है कि कौन सही है और कौन गलत — सवाल यह है कि क्या दुनिया चुप रहकर एक और मानवीय त्रासदी को देखने के लिए तैयार है?
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