
एम्स जोधपुर के आंकड़े क्या कहते हैं?
एम्स जोधपुर के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में पिछले एक साल में करीब 200 ब्रेस्ट कैंसर मरीजों की सर्जरी की गई। इनमें से लगभग 60 महिलाएं 25 से 40 साल की उम्र की थीं। हैरानी की बात यह है कि इनमें कुछ मरीजों की उम्र 25 से 30 साल के बीच भी थी। इतनी कम उम्र में बढ़ते मामलों ने डॉक्टरों को अलर्ट कर दिया है।
अब बदल रहा है ब्रेस्ट कैंसर का पैटर्न
पहले ब्रेस्ट कैंसर को आमतौर पर 60 से 70 साल की उम्र के बाद होने वाली बीमारी माना जाता था। इसके पीछे स्तनपान न कराना, देर से संतान होना या बच्चों की संख्या कम होना जैसे कारण बताए जाते थे।
लेकिन अब जो युवा मरीज सामने आ रहे हैं, उनमें ये कारण पूरी तरह लागू नहीं होते। इसलिए डॉक्टर अब इसे जीवनशैली, खानपान, हार्मोनल बदलाव और पर्यावरण के असर से जोड़कर देख रहे हैं।
जो पैटर्न पहले केवल मेट्रो शहरों में देखा जाता था, अब वही पश्चिमी राजस्थान में भी नजर आने लगा है।
देरी हुई तो इलाज मुश्किल
डॉक्टरों के मुताबिक ब्रेस्ट कैंसर की पहचान जितनी जल्दी हो जाए, इलाज उतना ही आसान और सफल होता है—
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स्टेज 1: 97 से 100 प्रतिशत मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं
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स्टेज 2: 90 से 95 प्रतिशत तक सफलता
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स्टेज 3: 60 से 70 प्रतिशत तक इलाज संभव
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स्टेज 4: सिर्फ 20 से 30 प्रतिशत तक ही इलाज सफल
इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।
एम्स जोधपुर में 2025 में हुईं 1000 कैंसर सर्जरी
साल 2025 में एम्स जोधपुर में करीब 1000 कैंसर सर्जरी की गईं—
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350 सर्जरी: मुंह, थायरॉयड, लैरिंक्स जैसे अंगों की
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200 सर्जरी: ब्रेस्ट कैंसर की
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170 सर्जरी: ओवेरियन और अन्य गायनी कैंसर की
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40 सर्जरी: आहार नली (फूड पाइप) की
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20 सर्जरी: फेफड़ों और अन्य अंगों की
पश्चिमी राजस्थान में आहार नली का कैंसर ज्यादा
डॉक्टरों के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में पेट के कैंसर की तुलना में आहार नली (फूड पाइप) का कैंसर ज्यादा पाया जा रहा है। इसकी बड़ी वजह खानपान की आदतें मानी जा रही हैं।
ओडिशा, जापान और कोरिया जैसे इलाकों में पेट कैंसर ज्यादा होता है, जहां मछली अधिक खाई जाती है।
डॉक्टरों की सलाह
एम्स जोधपुर के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. जीवन विश्नोई का कहना है कि युवा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामले बेहद चिंताजनक हैं। अगर कैंसर की पहचान स्टेज-1 में हो जाए, तो इलाज से लगभग 100 प्रतिशत तक मरीज ठीक हो सकते हैं। इसलिए महिलाओं को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय-समय पर जांच जरूर करानी चाहिए।
