भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने दिसंबर 2024 में अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेकर सभी फैंस को हैरान कर दिया था। यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला था क्योंकि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ब्रिस्बेन में चल रही टेस्ट सीरीज के बीच ही रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी। अब कई महीनों बाद, अपने यूट्यूब शो कुट्टी स्टोरीज में राहुल द्रविड़ के साथ बातचीत के दौरान अश्विन ने पहली बार अपने रिटायरमेंट की असली वजह बताई।
अश्विन ने कहा कि उन्हें अक्सर विदेशी दौरों पर टीम के साथ जाना पड़ता था, लेकिन ज्यादातर समय उन्हें बाहर बैठना पड़ता। ऐसे हालात ने उनके मन में असंतोष पैदा किया।
उन्होंने कहा – “जब भी भारत विदेशी दौरों पर जाता था, तो तेज गेंदबाजों को ही ज्यादा मौके मिलते थे। स्पिनरों को बाहर बैठना पड़ता। मुझे भी लंबे वक्त तक इसी स्थिति का सामना करना पड़ा। इससे मन में ऊब और थकान बढ़ गई।”
अश्विन ने माना कि लगातार टीम में रहकर भी मैदान पर मौका न मिलने से वह परेशान हो गए थे और आखिरकार उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला ले लिया। अश्विन ने बताया कि इस फैसले में उनके परिवार का भी बड़ा योगदान था। उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चों के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहते थे।
“बच्चे बड़े हो रहे हैं और मैं हमेशा टूर्स पर बाहर रहता था। मैंने सोचा, आखिर मैं कर क्या रहा हूँ? क्यों न उनके साथ रहकर परिवार को समय दूँ।”
दिलचस्प बात यह है कि अश्विन ने साफ कहा कि अगर उन्हें विदेशी दौरों पर लगातार खेलने का मौका मिलता तो वह शायद इतना जल्दी रिटायरमेंट नहीं लेते। उनके मुताबिक, उम्र बढ़ने और टीम से बाहर रहने की वजह से ही यह कदम उठाना पड़ा।
रविचंद्रन अश्विन ने भारत के लिए 100 से ज्यादा टेस्ट मैच खेले और 500 से ज्यादा विकेट हासिल किए। वह भारत के सबसे सफल स्पिनरों में गिने जाते हैं। भले ही उनका रिटायरमेंट अचानक आया हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनकी जगह हमेशा खास रहेगी।
रविचंद्रन अश्विन का संन्यास इस बात की याद दिलाता है कि खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति और परिवार के साथ संतुलन भी उतना ही ज़रूरी है जितना मैदान पर प्रदर्शन। अगर उन्हें विदेशी पिचों पर ज्यादा मौके मिलते, तो शायद भारतीय क्रिकेट को उनका साथ और लंबे समय तक मिलता।
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