ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच जॉर्डन की सतर्कता, नागरिक उड़ानों पर रोक
दुबई/अम्मान, 13 जून 2025 — ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अब जॉर्डन भी इस संकट से सीधे तौर पर प्रभावित होता नजर आ रहा है। ईरान द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई के दौरान जॉर्डन की राजधानी अम्मान में हवाई हमले के सायरन बजने लगे, जिसके बाद पूरे देश का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया।
ईरान की ओर से पलटवार, जॉर्डन ने मिसाइल-ड्रोन खतरे को बताया गंभीर
जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, देश की वायु सेना ने संभावित खतरे को देखते हुए हवाई निगरानी और रोकथाम की कार्रवाई शुरू कर दी है। एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने बताया कि:
“हमारा आकलन था कि ईरान से छोड़े गए ड्रोन और मिसाइलें हमारे हवाई क्षेत्र से गुजर सकती हैं और कुछ आबादी वाले हिस्सों में गिरने का खतरा था।”
इस चेतावनी को देखते हुए जॉर्डन ने तुरंत सभी उड़ानों के लिए एयरस्पेस को बंद करने का निर्णय लिया।
“सीमा सुरक्षा सर्वोपरि”, जॉर्डन की सेना अलर्ट पर
जॉर्डन की सेना ने स्पष्ट किया कि वह अपने क्षेत्र और नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सक्रिय है। एक अधिकारी ने कहा:
“हम अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए सतत कार्य कर रहे हैं और किसी भी देश को जॉर्डन की वायुसीमा का उल्लंघन नहीं करने देंगे।”
ईरानी ड्रोन इराक के रास्ते इजरायल की ओर रवाना
इस बीच इराकी सुरक्षा सूत्रों ने जानकारी दी कि ईरान से छोड़े गए 100 से अधिक ड्रोन को इराक के दियाला प्रांत होते हुए इजरायल की ओर बढ़ते हुए ट्रैक किया गया। स्थानीय निवासियों ने भी इन ड्रोन की आवाजाही की पुष्टि की है।
इजरायली सेना (IDF) के एक अधिकारी ने बताया कि:
“हमने इजरायल की सीमाओं के बाहर भी ड्रोन इंटरसेप्ट किए हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को पहले ही निष्क्रिय किया जा सके।”
जॉर्डन की रणनीतिक स्थिति और अमेरिका से नज़दीकी
यह ध्यान देने योग्य है कि जॉर्डन अमेरिका का प्रमुख सहयोगी है और क्षेत्र में उसकी कूटनीतिक भूमिका अहम रही है। 1990 के दशक में अमेरिकी मध्यस्थता के जरिए इजरायल-जॉर्डन समझौता हुआ था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया।
जॉर्डन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यदि भविष्य में उसकी संप्रभुता या नागरिकों पर खतरा होता है, तो वह जवाबी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा।
📌 निष्कर्ष: ईरान-इजरायल संघर्ष की लपटें अब पूरे क्षेत्र को घेर रहीं
इस ताजा घटनाक्रम ने दिखा दिया है कि यह संघर्ष अब केवल तेहरान और तेल अवीव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके भू-राजनीतिक प्रभाव जॉर्डन, इराक और पूरे मिडिल ईस्ट में महसूस किए जा रहे हैं।
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