संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क:
ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों को लेकर रविवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई। इस दौरान रूस, चीन और पाकिस्तान ने मिलकर एक तत्काल और बिना शर्त संघर्षविराम की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया, जबकि अमेरिका ने अपने कदम को “निर्णायक कार्रवाई” बताया।
गुटेरेस ने दी चेतावनी – ‘मध्य पूर्व एक खतरनाक मोड़ पर’
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला, मध्य पूर्व को और अधिक अस्थिर करने वाला कदम है। उन्होंने कहा,
“इस वक्त दुनिया को बातचीत और कूटनीति की सख्त जरूरत है, न कि बमबारी की।”
चीन और रूस का विरोध, अमेरिका का बचाव
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चीन के संयुक्त राष्ट्र दूत फू कॉन्ग ने कहा,
“ईरान के परमाणु मुद्दे पर कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। बल प्रयोग से स्थायी शांति नहीं मिल सकती।”
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रूस के राजदूत वासिली नेबेन्ज़िया ने अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका एक बार फिर 2003 जैसी कहानी दोहरा रहा है, जब इराक पर झूठे आरोप लगाकर हमला किया गया था।
“इतिहास से अमेरिका ने कुछ नहीं सीखा। एक बार फिर लाखों लोगों को तकलीफ देने की तैयारी की जा रही है।”
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अमेरिका की कार्यवाहक राजदूत डोरोथी शीया ने कहा कि वक़्त आ गया है कि
“ईरान को रोका जाए, जिससे वह इज़राइल को मिटाने की कोशिश और परमाणु हथियार बनाने की मंशा को खत्म करे।”
ईरान ने कहा – ‘हमारी संप्रभुता पर हमला, शांतिपूर्ण परमाणु अधिकार छीना गया’
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरवानी ने अमेरिका और इज़राइल पर “कूटनीति को खत्म करने” का आरोप लगाया और कहा कि
“परमाणु अप्रसार संधि (NPT) को अब एक राजनीतिक हथियार बना दिया गया है, जिसका इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के बहाने के रूप में हो रहा है।”
इज़राइल बोला – ‘यह आख़िरी सुरक्षा रेखा थी’
संयुक्त राष्ट्र में इज़राइल के राजदूत डैनी डैनॉन ने अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा,
“अगर समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो एक परमाणु ईरान हम सभी के लिए विनाश का कारण बनता।”
परिणाम ‘भयानक’ हो सकते थे – ब्रिटेन की चेतावनी
ब्रिटेन की संयुक्त राष्ट्र राजदूत बारबरा वुडवर्ड ने कहा,
“केवल सैन्य कार्रवाई से ईरान के परमाणु संकट का हल नहीं निकल सकता। सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और वार्ता की मेज़ पर लौटना चाहिए।”
IAEA प्रमुख बोले – ‘अब तक विकिरण नहीं फैला, लेकिन नुकसान का आकलन अधूरा’
IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने परिषद को जानकारी दी कि
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फोर्दो की सुरंगों के मुहानों को निशाना बनाया गया है
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इस्फ़हान में समृद्ध यूरेनियम के भंडारण क्षेत्र भी क्षतिग्रस्त हुए हैं
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नतांज़ केंद्र पर भी फिर से हमला हुआ है
उन्होंने यह भी जोड़ा कि,
“ईरान ने बताया है कि अभी तक किसी भी साइट से बाहर रेडिएशन स्तर में बढ़ोतरी नहीं हुई है।”
प्रस्ताव पर वोटिंग कब?
रूस, चीन और पाकिस्तान ने अपने संघर्षविराम प्रस्ताव पर सोमवार शाम तक अन्य देशों से प्रतिक्रिया मांगी है।
सुरक्षा परिषद में किसी भी प्रस्ताव को पारित होने के लिए कम से कम 9 मतों का समर्थन और अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस या ब्रिटेन में से किसी का वीटो न होना जरूरी होता है।
संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका इस प्रस्ताव को वीटो कर सकता है, क्योंकि इसमें ईरान पर हमलों की निंदा की गई है – हालांकि अमेरिका या इज़राइल का नाम नहीं लिया गया।
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