नई दिल्ली – भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रभाव से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। सैन्य दबाव और आक्रामक प्रतिक्रिया के चलते पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति डगमगाई हुई नजर आ रही है। इसी क्रम में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का हालिया बयान चर्चा का विषय बन गया है।
आसिफ ने कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर उनके देश में मदरसों के छात्रों को भी लड़ाई के मैदान में उतारा जा सकता है। उन्होंने इन्हें “दूसरी पंक्ति की सुरक्षा” (सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस) बताकर इस संभावित रणनीति का संकेत दिया। इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान अब संगठित सेना की बजाय धार्मिक छात्रों को युद्ध के लिए तैयार कर रहा है?
भारतीय ऑपरेशन के कारण मची अफरातफरी
भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित सैन्य ठिकानों में घबराहट का माहौल बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, भारत की सख्ती से घबराकर कई पाकिस्तानी सैनिक अपने कैंप छोड़कर भाग गए हैं। खासकर सिंध कैंटोनमेंट क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है।
ख्वाजा आसिफ की बयानबाजी पर सवाल
ख्वाजा आसिफ पहले भी भारत के खिलाफ उग्र बयान देते रहे हैं, लेकिन इस बार उनकी भाषा और रणनीति में घबराहट साफ झलक रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की कार्रवाइयों का निशाना भारत के सैन्य प्रतिष्ठान थे, आम नागरिक नहीं। मगर उनके बयानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या खो रहा है नियंत्रण पाकिस्तान?
ख्वाजा आसिफ पाकिस्तान के रक्षा मंत्री जरूर हैं, लेकिन उनके हालिया बयानों से स्पष्ट है कि उनके पास स्थिति को नियंत्रण में रखने का सामर्थ्य नहीं रह गया है। भारतीय सैन्य ऑपरेशन के असर से परेशान पाकिस्तान केवल बयानबाज़ी और धमकी जैसे उपायों का सहारा ले रहा है।
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