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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की हलचल, चीन से हाइपरसोनिक हथियारों की खरीद की तैयारी

नई दिल्ली: भारत के निर्णायक ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान एक बार फिर अपनी सैन्य रणनीतियों को तेज करने की कोशिश में जुट गया है। ताजा जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान अब चीन से अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलें और उन्नत ड्रोन तकनीक खरीदने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इस कदम को विशेषज्ञ भारत के लिए एक संभावित खतरे के रूप में देख रहे हैं।


हाइपरसोनिक हथियारों की ओर झुका पाकिस्तान

पाकिस्तान के पास सीमित स्वदेशी रक्षा तकनीक होने के चलते वह एक बार फिर बीजिंग का सहारा ले रहा है। चीन ने बीते कुछ वर्षों में हाइपरसोनिक मिसाइल और ड्रोन सिस्टम में बड़ी प्रगति की है। अब यही तकनीक पाकिस्तान को हस्तांतरित करने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, चीन के हाइपरसोनिक हथियार ध्वनि की गति से 5 से 10 गुना तेज हैं और इन्हें पकड़ना पारंपरिक रडार सिस्टम के लिए बेहद कठिन है। इतना ही नहीं, चीन “स्मार्ट स्वार्म” टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रहा है, जिसमें दर्जनों ड्रोन एक नेटवर्क के जरिए सामूहिक रूप से लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं।


क्यों खतरनाक हैं ये हाइपरसोनिक मिसाइलें?

  • रफ्तार: हाइपरसोनिक हथियार बहुत तेज़ गति से चलते हैं (Mach 5+), जिससे उन्हें इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

  • ट्रैकिंग में कठिनाई: ये कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिससे रडार की पकड़ से बच निकलते हैं।

  • स्मार्ट नेटवर्क: जब ये मिसाइलें और ड्रोन “स्वार्म” में काम करते हैं, तो सामूहिक रूप से एक ही लक्ष्य को निशाना बनाकर भारी तबाही मचा सकते हैं।

  • परमाणु क्षमता: इन हथियारों को परमाणु विस्फोटक से लैस किया जा सकता है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा को और गंभीर बना देता है।


भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौती

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि पाकिस्तान इन हथियारों का इस्तेमाल सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ाने या आतंकवाद को समर्थन देने के लिए कर सकता है। इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान ने पहले भी चीनी हथियारों के सहारे कई बार भारत को उकसाने की कोशिश की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह खरीदारी केवल एक सैन्य सौदा नहीं, बल्कि रणनीतिक खतरा भी है, जिसका मकसद भारत की सैन्य श्रेष्ठता को चुनौती देना है।


चीन की मंशा पर भी सवाल

चीन ने यह तकनीक पहले अमेरिका की प्रतिस्पर्धा में विकसित की थी, लेकिन अब वह इसे अपने सहयोगी देशों के साथ साझा कर रहा है, जिनमें पाकिस्तान सबसे आगे है। यह कदम पूरे दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है।


भारत की प्रतिक्रिया: डिफेंस सिस्टम पर तेजी से काम जारी

भारत भी इस चुनौती के प्रति सजग है। DRDO और अन्य रक्षा एजेंसियां हाइपरसोनिक तकनीक पर शोध कर रही हैं। भारत की अग्नि और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें पहले से ही विश्वसनीय हैं, लेकिन नई तकनीक के चलते भारत अब एडवांस एयर डिफेंस और इंटरसेप्टर सिस्टम पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पाकिस्तान चीन के हाइपरसोनिक हथियारों तक पहुंच बनाता है, तो भारत को अपनी स्ट्रैटेजिक डिटेरेंस और रेस्पॉन्स कैपेबिलिटी को और उन्नत करना होगा।

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