यरुशलम/गाजा/दोहा:
इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और सुरक्षा तंत्र अब गाजा से बाहर बैठे हमास नेताओं के खात्मे की योजना पर तेजी से काम कर रहे हैं। खासकर उन वरिष्ठ कमांडरों को निशाना बनाने की तैयारी है जो अभी लेबनान और कतर में शरण लिए हुए हैं। यह मिशन इजराइल की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें गाजा में हमास के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने के बाद अब विदेशों में छिपे नेताओं की तलाश की जा रही है।
🎯 मकसद: हमास नेतृत्व की रीढ़ तोड़ना
इजराइल पहले ही गाजा में कई बड़े हमास कमांडरों को एयरस्ट्राइक और सुरंग हमलों में ढेर कर चुका है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अल-कस्साम ब्रिगेड के दो बड़े कमांडर — मोहम्मद सिनवार और मोहम्मद शबानेह — खान यूनिस और राफा में मारे गए। इसके बाद मोसाद, शिन बेट (इजराइल की आंतरिक सुरक्षा सेवा) और सेना का ध्यान अब चार खास नेताओं पर है।
🔍 अब कौन हैं इजराइली रडार पर?
सैन्य विश्लेषक एवी अश्केनाज़ी की रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित हमास नेता इजराइल के टॉप टारगेट हैं:
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इज़ अल-दीन अल-हद्दाद – गाजा ब्रिगेड कमांडर, जिन्हें मारने के कई प्रयास हो चुके हैं।
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ओसामा हमदान – लेबनान में हमास का प्रमुख चेहरा और राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य।
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इस्माइल हनिया – हमास का वैश्विक चेहरा, जो फिलहाल कतर में हैं और शांति वार्ता में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
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अन्य अज्ञात वरिष्ठ कमांडर – जिनकी पहचान सुरक्षा कारणों से अभी उजागर नहीं की गई है।
🧨 इजराइल का बदला: कतर भी नहीं है सुरक्षित?
विशेषज्ञों का मानना है कि मोसाद की कार्यशैली में सीमा या देश की सीमाएं कभी रुकावट नहीं रहीं। इतिहास में भी कई मौकों पर उसने दूसरे देशों में हमास नेताओं को टारगेट किया है। यह संकेत है कि कतर में मौजूद हमास नेतृत्व, भले ही वह शांति वार्ता में शामिल हो, अब इजराइली रडार पर है।
💥 गाजा में भीषण तबाही, नागरिकों पर हमला
गाजा में इजराइली सेना के हमले अब भी रुके नहीं हैं। हाल ही में एक बार फिर, खाद्य सहायता की लाइन में खड़े लोगों पर गोलीबारी हुई, जिसमें कम से कम 27 नागरिक मारे गए।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक इस संघर्ष में 55,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या आम नागरिकों की है। हालांकि, जमीनी स्थिति और सीमित रिपोर्टिंग के चलते वास्तविक आंकड़े इससे भी अधिक हो सकते हैं।
🔚 क्या वार्ता अब भी संभव है?
जहां एक ओर कतर में शांति वार्ता की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर इजराइल का रुख संकेत देता है कि वह शांतिप्रिय नेताओं को भी बख्शने के मूड में नहीं है।
यह नीति भविष्य में इस पूरे संघर्ष को और अधिक जटिल और खतरनाक बना सकती है।
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