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कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में काम कर रहे लगभग 51 हजार अतिथि शिक्षकों को पिछले साल नवंबर से अब तक वेतन नहीं मिला है। वेतन नहीं मिलने के कारण हजारों शिक्षक आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं और सरकार से जल्द भुगतान की मांग कर रहे हैं।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी
कर्नाटक के कई सरकारी स्कूल पहले से ही स्थायी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या और ज्यादा गंभीर है। ऐसे में अतिथि शिक्षक स्कूलों में पढ़ाई का काम संभालते हैं और इस कमी को पूरा करते हैं। लेकिन लंबे समय से वेतन नहीं मिलने से उनकी स्थिति कठिन हो गई है।
10 से 12 हजार रुपये मिलता है मानदेय
बेंगलुरु के लिंक रोड स्थित एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली अतिथि शिक्षिका सुरेखा ने बताया कि उन्हें अनुभव के आधार पर लगभग 10 हजार से 12 हजार रुपये तक मानदेय मिलता है। लेकिन उन्हें नवंबर से अब तक कोई भुगतान नहीं मिला है।
इस समस्या को लेकर कर्नाटक स्टेट प्राइमरी एंड सेकेंडरी स्कूल गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और प्रधान सचिव को पत्र भी भेजा है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है।
12 महीने काम, वेतन केवल 10 महीने का
यलहंका के एक सरकारी स्कूल में काम कर रहे एक शिक्षक ने बताया कि वे पूरे 12 महीने काम करते हैं, लेकिन उन्हें केवल 10 महीने का ही वेतन मिलता है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च को उनका अनुबंध खत्म हो जाएगा और इसके बाद दोबारा नियुक्ति होगी या नहीं, यह विभाग के फैसले पर निर्भर करता है।
पढ़ाई पर भी पड़ सकता है असर
शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. निरंजनाराध्य वी.पी. ने मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या से अतिथि शिक्षकों का बकाया वेतन जल्द जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा में अतिथि शिक्षक अहम भूमिका निभाते हैं।
अगर लंबे समय तक वेतन नहीं मिला, तो इससे शिक्षकों की स्थिति खराब होगी और बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
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