तेहरान/वॉशिंगटन:
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बाद हाल ही में हुआ युद्धविराम तो लागू हो गया, लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की एक सप्ताह से सार्वजनिक रूप से गैरहाज़िरी ने एक नई बहस और गहरी चिंता को जन्म दे दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इज़राइल और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा किए 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन खामेनेई न तो देश को संबोधित कर रहे हैं, न ही उनके निवास या कार्यालय से उनकी मौजूदगी की पुष्टि हो रही है।
‘प्रार्थना करते रहें’: अधिकारी ने चुप्पी तोड़ी
न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में खामेनेई के अभिलेखागार विभाग के प्रमुख मेहदी फज़ाएली से जब उनके स्वास्थ्य को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट उत्तर देने से बचते हुए बस इतना कहा, “हमें प्रार्थना करते रहना चाहिए।”
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि देशभर से नेताओं और आम नागरिकों के संदेश उनके पास आ रहे हैं, सभी यही पूछ रहे हैं—खामेनेई कहाँ हैं?
फज़ाएली ने सुरक्षा को लेकर बस इतना कहा कि “जो लोग सर्वोच्च नेता की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं, वे अपना काम बखूबी कर रहे हैं। ईश्वर ने चाहा तो लोग जल्द ही अपने नेता के साथ जश्न मना सकेंगे।”
बंकर में छिपे होने की अटकलें
पिछले सप्ताह कुछ ईरानी सूत्रों ने दावा किया था कि खामेनेई एक अज्ञात भूमिगत सुरक्षित स्थल में हैं और किसी भी प्रकार की डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक संचार से दूरी बनाए हुए हैं ताकि संभावित हत्या के प्रयासों से बचा जा सके। लेकिन उनकी लगातार चुप्पी ने इन दावों पर भी संदेह खड़ा कर दिया है।
स्वास्थ्य या साजिश?
86 वर्षीय खामेनेई की चुप्पी ने केवल जनता ही नहीं, बल्कि तेहरान के कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों को भी परेशान कर दिया है। रियल एस्टेट विषयक अखबार ‘ख़ानेमान’ के संपादक मोहसिन खलीफ़ेह ने कहा, “जो लोग खामेनेई से प्रेम करते हैं, उनके लिए ये दिन भारी चिंता के हैं।”
जब उनसे खामेनेई की मृत्यु की अफवाहों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “अगर ऐसा कुछ हुआ होता, तो उनकी शव यात्रा इतिहास की सबसे भव्य होती।”
ट्रंप की कार्रवाई और उसके बाद युद्धविराम
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने ईरान के तीन अहम सैन्य और परमाणु ठिकानों पर एकतरफा कार्रवाई की थी। यह हमला उस वक्त हुआ जब इज़राइल और ईरान के बीच मिसाइल हमले हो रहे थे।
ईरान ने दावा किया कि इन हमलों में उसके 600 से ज्यादा नागरिक मारे गए और लगभग 5,000 घायल हुए। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने तेल अवीव और यरूशलेम को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम 14 लोगों की मौत हुई।
ट्रंप ने इन कार्रवाइयों के बाद कहा, “अब शांति का समय है।” और दोनों देशों से युद्धविराम बनाए रखने की चेतावनी भी दी।
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