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कोटा। कोचिंग सिटी के “ब्रांड एम्बेसडर” कोई बड़ी सेलिब्रिटी नहीं, बल्कि यहां पढ़ने वाले बच्चे ही हैं। कोटा की छवि को बेहतर बनाने के लिए पूरा शहर एकजुट हो गया है। इस साल कोचिंग में छात्रों की संख्या 30-35% कम हो गई है, जिससे शहर की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है।
कोटा को आकर्षक बनाने के लिए किए गए प्रयास
- कोचिंग संस्थानों में फन एक्टिविटी और चम्बल रिवर फ्रंट, सिटी पार्क जैसी जगहों पर आउटिंग।
- बीच में कोचिंग छोड़ने वालों के लिए फी रिफंड पॉलिसी।
- स्कॉलरशिप के जरिए कोचिंग की फीस को अफॉर्डेबल बनाना।
- “कामयाब कोटा” अभियान के तहत जिला कलेक्टर और एसपी का छात्रों से संवाद।
- के-एसओएस एप, जिसमें पैनिक बटन दबाने पर तुरंत सहायता मिलती है।
- जिला प्रशासन द्वारा छात्रों के लिए यूनिक आईडी तैयार करना।
- सोशल मीडिया पर सुरक्षित और अफॉर्डेबल कोटा की छवि दिखाने के लिए हॉस्टल और पीजी मालिकों द्वारा अभियान।
- होटलों और पर्यटन व्यवसायियों द्वारा स्टूडेंट टूरिज्म को बढ़ावा देना।
पढ़ाई पर कोई सवाल नहीं
हालांकि पिछले साल कोटा की छवि को लेकर कुछ सवाल उठे, लेकिन यहां की पढ़ाई और परिणामों पर कोई संदेह नहीं है। कोटा हर साल बेहतरीन रिजल्ट दे रहा है, और यहां लगातार इनोवेशन के जरिए पढ़ाई को बेहतर बनाया जा रहा है।
हमारा उद्देश्य – पेरेंट्स को बच्चों की सुरक्षा का भरोसा देना
हमारी कोशिश है कि पेरेंट्स अपने बच्चों को कोटा भेजकर निश्चिंत महसूस करें। इसके लिए स्टूडेंट-फ्रेंडली माहौल तैयार किया जा रहा है, जिसमें के-एसओएस एप, संवाद, शिकायत निवारण सेल, और बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए विशेष टीम जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
– डॉ. अमृता दुहन, सिटी एसपी कोटा
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