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अक्सर हम दर्द को मामूली समझकर टाल देते हैं। खासकर कई महिलाएं दर्द सहने की आदत डाल लेती हैं और डॉक्टर के पास जाने में देर कर देती हैं। बाहर से यह उनकी मजबूती लगती है, लेकिन सेहत के लिए यह खतरनाक हो सकता है।
महिलाओं की जिंदगी में दर्द को माना जाता है सामान्य
बचपन से ही कई महिलाओं को सिखाया जाता है कि कुछ दर्द जीवन का हिस्सा है।
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पीरियड्स का दर्द
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प्रेग्नेंसी के दौरान तकलीफ
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हार्मोनल बदलाव
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मेनोपॉज
बार-बार दर्द झेलने से नई तकलीफ भी सामान्य लगने लगती है। जैसे पेट दर्द को क्रैम्प समझ लेना, थकान को काम का असर मान लेना या सीने में हल्की तकलीफ को गैस समझ लेना। इसी कारण कई बार गंभीर बीमारी का पता देर से चलता है।
समाज की सोच भी बनती है कारण
समाज अक्सर महिलाओं से उम्मीद करता है कि वे मजबूत रहें और शिकायत न करें। कई महिलाएं परिवार और काम को अपनी सेहत से ज्यादा महत्व देती हैं। उन्हें डर रहता है कि दर्द की बात करने पर लोग उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर बोलने वाला समझेंगे। इसलिए वे जांच कराने में देर करती हैं।
शरीर की बनावट का भी असर
महिलाओं में हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दर्द महसूस करने के तरीके को प्रभावित करते हैं। कुछ बीमारियां जैसे माइग्रेन, फाइब्रोमायल्जिया और ऑटोइम्यून समस्याएं महिलाओं में ज्यादा पाई जाती हैं। बार-बार होने वाला दर्द धीरे-धीरे सामान्य लगने लगता है, लेकिन शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है।
साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा
दिल की बीमारी सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है। महिलाओं में भी यह एक बड़ा खतरा है। फर्क यह है कि महिलाओं में लक्षण अलग हो सकते हैं, जैसे:
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ज्यादा थकान
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सांस फूलना
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मतली
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जबड़े या पीठ में दर्द
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सीने में हल्का दबाव
ये लक्षण हल्के लगते हैं, इसलिए अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। समय पर इलाज न मिलने से दिल को गंभीर नुकसान हो सकता है।
स्त्री रोगों को भी न करें नजरअंदाज
पेल्विक दर्द को कई बार सिर्फ पीरियड्स का दर्द समझ लिया जाता है, जबकि इसके पीछे गंभीर कारण हो सकते हैं। लंबे समय तक अनदेखी करने से आगे चलकर जटिल समस्याएं हो सकती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
लगातार दर्द से नींद खराब होती है, तनाव बढ़ता है और चिंता या डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ सकता है। दर्द शरीर का संकेत है कि ध्यान देने की जरूरत है।
समय पर जांच और इलाज कराने से बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है। इसलिए हर दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें।
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