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गुजरात में ई-रूपी से राशन वितरण की शुरुआत के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी इस योजना पर काम शुरू हो गया है। बाराबंकी जिले में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की तैयारी चल रही है। खाद्य एवं रसद मंत्रालय की टीम ने यहां सर्वे भी किया है।
ई-रूपी योजना का उद्देश्य राशन वितरण को पारदर्शी और आसान बनाना है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी 5 अहम बातें।
1️⃣ ATM की तरह काम करेगी व्यवस्था
ई-रूपी प्रणाली ATM की तर्ज पर काम करेगी। तय तारीख पर कार्डधारक मशीन के माध्यम से कहीं से भी अपना राशन ले सकेंगे। इससे लंबी लाइन और गड़बड़ी की समस्या कम होगी। बाराबंकी में करीब 6.42 लाख लाभार्थियों को 1380 कोटेदारों के जरिए राशन मिलता है।
2️⃣ मंत्रालय की टीम ने किया सर्वे
खाद्य एवं रसद मंत्रालय की चार टीमें बाराबंकी पहुंचीं और करीब 15 दिन तक जमीनी स्तर पर अध्ययन किया। कोटेदारों की कार्यप्रणाली देखी गई और लाभार्थियों से बातचीत की गई। यह भी देखा गया कि लोग स्मार्टफोन या साधारण मोबाइल कितना इस्तेमाल करते हैं।
3️⃣ बैंक खाता या स्मार्टफोन जरूरी नहीं
जिला पूर्ति अधिकारी के अनुसार, यह एक डिजिटल वाउचर की तरह काम करेगा।
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लाभार्थी के मोबाइल नंबर पर SMS या QR कोड भेजा जाएगा।
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स्मार्टफोन होने पर QR कोड मिलेगा, जिसे दुकानदार स्कैन करेगा।
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साधारण मोबाइल होने पर OTP के जरिए राशन मिलेगा।
इसके लिए बैंक खाता या स्मार्टफोन होना जरूरी नहीं है।
4️⃣ सरकार की क्या मंशा है?
खाद्य एवं रसद मंत्री के अनुसार, सरकार की कोशिश है कि हर जरूरतमंद तक आसानी से राशन पहुंचे। गुजरात के बाद अब इसे उत्तर प्रदेश में लागू करने की तैयारी है।
5️⃣ पहले भी हुआ था पायलट प्रयोग
गोरखपुर में पहले “राशन ATM” योजना शुरू की गई थी। इसका मकसद घटतौली रोकना था। लेकिन बिजली बिल और तकनीकी दिक्कतों के कारण योजना सफल नहीं हो पाई। कोटेदारों को भारी बिजली बिल खुद देना पड़ता था, जिससे परेशानी बढ़ी।
निष्कर्ष
ई-रूपी राशन योजना से पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभार्थियों को सुविधा मिलेगी। हालांकि इसे सफल बनाने के लिए तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान जरूरी होगा।
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