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क्यूरेटर विवाद पर गौतम गंभीर को मिला भारतीय दिग्गज का साथ, हेडन को दिया करारा जवाब

भारतीय क्रिकेट टीम के इंग्लैंड दौरे पर एक दिलचस्प विवाद सुर्खियों में रहा। एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के आखिरी टेस्ट से ठीक पहले ‘द ओवल’ के पिच क्यूरेटर ली फोर्टिस और टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के बीच गर्मागर्मी हो गई। इस बहस का कारण था पिच का मुआयना। गंभीर पिच को करीब से देखना चाहते थे, लेकिन क्यूरेटर ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर मैथ्यू हेडन ने गंभीर की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें क्यूरेटर से बात करते समय भाषा में नरमी बरतनी चाहिए थी और अपना लहजा थोड़ा सौम्य रखना चाहिए था। हेडन का मानना था कि इंग्लैंड में क्यूरेटर अपनी पिच को लेकर सुरक्षात्मक रवैया रखते हैं, और यह वहां आम बात है।

लेकिन इस आलोचना के बाद पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप वेंगसरकर खुलकर गंभीर के समर्थन में आ गए। वेंगसरकर ने कहा — “भारतीय टीम का कोच होने के नाते गौतम गंभीर को पिच देखने का पूरा हक है। भारत में जब विदेशी टीमें आती हैं, तो कप्तान और कोच ही नहीं, पूरी टीम पिच का बारीकी से निरीक्षण करती है। फिर इंग्लैंड में ये नियम अलग क्यों हों?”

वेंगसरकर ने आगे हेडन को जवाब देते हुए कहा — “अगर किसी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी या कोच को किसी अहम मैच से पहले पिच से दूर रहने को कहा जाता, तो वे भी क्यूरेटर को उसकी जगह दिखा देते। ऐसे में वे भी सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते।”

इस बयान के बाद मामला और चर्चा में आ गया। कई क्रिकेट प्रेमियों का मानना है कि कोच को पिच का जायजा लेने का पूरा अधिकार है, क्योंकि मैच की रणनीति उसी के आधार पर बनती है। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि इंग्लैंड के स्थानीय नियमों और परंपराओं का सम्मान करना भी जरूरी है।

अब देखना यह है कि भविष्य में इस तरह के विवादों को टालने के लिए क्रिकेट बोर्ड क्या नए दिशा-निर्देश लाता है, ताकि पिच मुआयना जैसे छोटे मुद्दे बड़े विवाद में न बदलें।

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