Related Articles
गंगानगरी किन्नू इस बार अपने खास रंग, स्वाद और मिठास के लिए ‘ऑरेंज गोल्ड’ बन गया है। इसके पीछे ठंडी हवाएं, सुबह की हल्की धुंध और दिन-रात के तापमान का संतुलन मुख्य कारण हैं।
किन्नू का महत्व
-
श्रीगंगानगर अब राजस्थान और देश का सबसे बड़ा किन्नू उत्पादन केंद्र बन चुका है।
-
यह केवल फल नहीं, बल्कि किसानों की पहचान, जिले की अर्थव्यवस्था और निर्यात का आधार बन गया है।
-
राज्य सरकार ने भी इसे पंच गौरव योजना में शामिल कर इसकी महत्ता स्वीकार की है।
किन्नू का इतिहास
-
श्रीगंगानगर में किन्नू की खेती लगभग 59 साल पुरानी है।
-
1962 में करतार सिंह नरूला ने पौधे लाकर शुरुआत की थी।
-
दोमट मिट्टी, अच्छी सिंचाई और ठंडा मौसम इसे विशिष्ट बनाते हैं।
-
इस सीजन मौसम अनुकूल होने से उत्पादन में लगभग 25% वृद्धि की उम्मीद है।
स्थानीय उपयोग और वैश्विक बाजार
-
अधिकांश किन्नू स्थानीय स्तर पर ताजा फल के रूप में खाया जाता है।
-
शेष को ग्रेडिंग, वैक्सिंग और पैकिंग के बाद देशभर के बड़े शहरों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई) और थाईलैंड, मलेशिया, इंग्लैंड, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल तक भेजा जाता है।
-
इनसे जूस, स्क्वैश, फ्लेवर्ड ड्रिंक और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं।
कीमत और लाभ
-
किसान से किन्नू का भाव: 25-30 रुपए प्रति किलो
-
खुदरा बाजार में किन्नू: 40-50 रुपए प्रति किलो
-
यदि स्थानीय प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन उद्योग बढ़ाया जाए, तो किसानों की आय में कई गुना वृद्धि संभव है।
गंगानगरी किन्नू की जानकारी
-
कुल क्षेत्रफल: 12,220 हेक्टेयर
-
ड्रिप सिंचाई क्षेत्र: 8,818 हेक्टेयर
-
फलत अवस्था क्षेत्र: 10,359 हेक्टेयर
-
अनुमानित उत्पादन: 3.50 लाख मीट्रिक टन
-
प्रमुख आयातक देश: थाईलैंड, मलेशिया, इंग्लैंड, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल
विशेषज्ञ की राय
प्रीतिबाला, उप निदेशक, उद्यान विभाग, श्रीगंगानगर कहते हैं कि यदि स्थानीय प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिले, तो गंगानगरी किन्नू किसानों की आय दोगुनी कर सकता है और श्रीगंगानगर को वैश्विक फूड मैप पर मजबूत स्थिति दिला सकता है।
CHANNEL009 Connects India
