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गाजर से नकली बन जाएगा ‘शुद्ध देसी घी’, बड़ी-बड़ी लैब्स खा रही हैं धोखा, IIT ने बताया कैसे हो रहा खेल

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गाजर से नकली बन सकता है ‘शुद्ध देसी घी’? IIT ने बताया कैसे हो रहा मिलावट का खेल

संपादक: नीरज पारवानी

खाने-पीने की चीजों में मिलावट को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब नकली ‘शुद्ध देसी घी’ बनाने के लिए गाजर जैसे प्राकृतिक रंग वाले पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा है। दावा है कि इस तरह तैयार किया गया नकली घी दिखने और रंग में असली घी जैसा लगता है, जिसकी वजह से कई बड़ी लैब्स भी धोखा खा सकती हैं।

IIT से जुड़े शोधकर्ताओं ने बताया है कि मिलावटखोर घी के रंग, खुशबू और टेक्सचर को असली जैसा दिखाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। गाजर में मौजूद प्राकृतिक रंग का इस्तेमाल घी को पीला और आकर्षक दिखाने के लिए किया जा सकता है।

कैसे हो रहा मिलावट का खेल?

नकली घी बनाने में सस्ते तेल, फैट और रंग देने वाले पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है। जब इसमें गाजर या ऐसे ही रंग देने वाले तत्व मिलाए जाते हैं, तो यह देखने में देसी घी जैसा लगता है। यही वजह है कि सामान्य जांच या आंखों से पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

लैब जांच को भी चुनौती

रिपोर्ट्स में दावा है कि कई बार मिलावट इतनी चालाकी से की जाती है कि शुरुआती लैब टेस्ट में भी असली-नकली का फर्क पकड़ना आसान नहीं होता। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए एडवांस टेस्टिंग तकनीक और सख्त निगरानी जरूरी है।

ग्राहकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

ग्राहकों को खुले या बिना ब्रांड वाले घी से बचना चाहिए। हमेशा भरोसेमंद ब्रांड, बिल और FSSAI मार्किंग देखकर ही घी खरीदें। बहुत सस्ता घी मिलने पर सावधान रहें।

कुल मिलाकर, नकली देसी घी का यह नया तरीका उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। अब जरूरत है कि खाद्य विभाग सख्त जांच करे और लोग खरीदारी में ज्यादा सतर्क रहें।

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