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छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का दबदबा घटा, राजनांदगांव, खैरागढ़ और कवर्धा को मिली नई पहचान

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और कवर्धा जिलों में नक्सली गतिविधियों में अब काफी कमी आ गई है। इन जिलों को अब नक्सल प्रभावित की जगह ‘लीगेसी’ और ‘थर्ड डिस्ट्रिक्ट’ की श्रेणी में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार ने यह फैसला किया है ताकि इन इलाकों में दोबारा नक्सली सक्रिय न हो सकें।

सुरक्षा के लिए रहेगा फोर्स तैनात

हालांकि अब ये जिले नक्सल प्रभावित नहीं हैं, फिर भी यहां सुरक्षा बनाए रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती में राज्य सरकार की मदद की जाएगी। मोहला-मानपुर और अबाबगढ़ चौकी जैसे इलाकों को भी नक्सल इलाकों की श्रेणी से बाहर लाकर ‘डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न’ में डाला गया है, ताकि वहां नक्सली फिर से पैर न जमा सकें।

ऑपरेशन से नक्सली हुए कमजोर

केंद्र और राज्य सरकार के लगातार ऑपरेशन के चलते नक्सली अब बैकफुट पर आ गए हैं। पिछले कुछ सालों में नक्सलियों ने इन जिलों में कोई बड़ी घटना को अंजाम नहीं दिया है। इसके चलते केंद्र सरकार ने राजनांदगांव, खैरागढ़ और कवर्धा को नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से हटाकर लीगेसी श्रेणी में रखा है। वहीं, मोहला-मानपुर-चौकी जिले को अब हाई नक्सल जोन की बजाय ‘एलडब्लूई’ श्रेणी में रखा गया है।

पहले कैसे था हाल

अविभाजित राजनांदगांव जिले में 1992 में पहली बार बकरकट्टा गांव में नक्सली घटना हुई थी। इसके बाद 35 सालों तक नक्सलियों ने पूरे इलाके में अपना दबदबा बना लिया था। 2009 में मोहला-मानपुर के कोरकोट्टी में हुई मुठभेड़ में तत्कालीन एसपी विनोद चौबे समेत 29 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया था।

नक्सली संगठन रहे सक्रिय

राजनांदगांव, खैरागढ़ और मोहला-मानपुर इलाकों में दर्रेकसा दलम, प्लाटून नंबर 1, मलाजखंड एरिया कमेटी और ताड़ा दलम एरिया कमेटी जैसे नक्सली संगठन लंबे समय तक सक्रिय रहे। ये नक्सली गढ़चिरौली, गोंदिया, बालाघाट और कवर्धा जैसे इलाकों में भी गतिविधियां करते थे।

अब नहीं मिलेगा अलग फंड

राजनांदगांव, खैरागढ़ और कवर्धा जिलों को अब अलग से कोई विशेष फंड नहीं मिलेगा। हालांकि, थानों, चौकियों और विकास कार्यों के लिए सामान्य फंड मिलता रहेगा। वहीं मोहला-मानपुर जिले की श्रेणी में सुधार के कारण अब वहां मिलने वाली राशि भी घटा दी गई है। पहले इस जिले को 30 करोड़ रुपए मिलते थे, लेकिन अब सालाना सिर्फ 10 करोड़ रुपए ही मिलेंगे।

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