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रायपुर:
छत्तीसगढ़ में 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो गई है, लेकिन अब तक अधिकांश सरकारी और निजी स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची हैं। कुछ स्कूलों में किताबें आना शुरू हुई हैं, लेकिन वह भी अधूरी हैं। कई जिलों में बच्चे पुरानी किताबों से पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
📚 पहली से 10वीं तक की किताबें फ्री मिलती हैं
राज्य सरकार पहली से 10वीं तक के विद्यार्थियों को नि:शुल्क किताबें देती है। यह सुविधा मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के छात्रों को भी मिलती है। इस साल लगभग दो करोड़ किताबें छपनी थीं, लेकिन छपाई का काम अब भी जारी है, इसलिए स्कूलों तक किताबें नहीं पहुंच पाईं।
🏫 रायपुर ही नहीं, बाकी जिलों का भी यही हाल
रायपुर सहित अन्य जिलों में भी किताबों की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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सरकारी स्कूल पुरानी किताबों से पढ़ा रहे हैं
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निजी स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर की किताबें लगाई जा रही हैं
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किताबों के वितरण में डिपो से सीधा स्कूलों तक पहुंचाने की कोशिश हो रही है
⚠️ पाठ्य पुस्तक निगम की लापरवाही बनी बड़ी वजह
जानकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की लापरवाही के चलते यह देरी हुई है।
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सरकार ने किताबों पर बार कोड लगाने के निर्देश दिए थे, ताकि भ्रष्टाचार रुके
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शुरू में निगम ने इसे नजरअंदाज किया, बाद में काम शुरू किया
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अब आईआईटी भिलाई की मदद से बार कोड सिस्टम लागू किया जा रहा है
🗣️ क्या कहता है प्रशासन
वरिष्ठ प्रबंधक जुगनु सिंह ने बताया कि
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सरकारी स्कूलों में किताबें भेजी जा रही हैं
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प्रिंटिंग का काम अभी भी चल रहा है
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4 जुलाई से निजी स्कूलों में भी किताबें पहुंचने लगेंगी
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किताबों की स्थिति की जानकारी स्थानीय डिपो से ली जा सकती है
📌 निष्कर्ष
किताबों की देरी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सरकार को चाहिए कि वितरण प्रक्रिया में गति लाई जाए, ताकि बच्चों को समय पर पढ़ाई का पूरा लाभ मिल सके।
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