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जयपुर।
ट्रैफिक पुलिस में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक पुलिसकर्मी कमिश्नरेट के अधिकारी के पास खुद जाकर यह कहने पहुंच गया कि “मकान बनाना है, चालान करने की इजाजत दीजिए।” उसने कहा कि चालान से होने वाली आमदनी से वह मकान बना रहा था, लेकिन अब कमिश्नर के आदेश के बाद चालान बंद हो गया है, जिससे परेशानी हो रही है। अफसर ने उसे डांटकर वापस भेज दिया।
चालान बंद क्यों हुए?
दरअसल, ट्रैफिक पुलिसकर्मियों द्वारा बिना ट्रैफिक सुधारे सिर्फ चालान करने और अवैध वसूली की शिकायतें मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसफ ने कांस्टेबल से लेकर एएसआई तक को चालान करने पर रोक लगा दी थी।
ड्यूटी छोड़ गुमटियों में बैठे नजर आए पुलिसकर्मी
आदेश के बाद कुछ पुलिसकर्मी ड्यूटी पर ट्रैफिक संभालने के बजाय गुमटियों में बैठे नजर आने लगे। इस लापरवाही को देखते हुए ट्रैफिक डीसीपी ने 17 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया।
दूसरी बड़ी घटनाएं:
▶ सटोरियों से 25 लाख लेकर छोड़ा
जयपुर दक्षिण की एक स्पेशल टीम के 5 पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने दो सटोरियों से 25 लाख रुपए लेकर केस दर्ज नहीं किया। एक ईमानदार पुलिसकर्मी ने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी। इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें 3 सस्पेंड और 2 लाइन हाजिर किए गए।
▶ जेल के बंदियों को कराई मौज-मस्ती
जयपुर सेंट्रल जेल के कुछ बंदियों को पैसे लेकर जेल अस्पताल से एसएमएस अस्पताल रेफर करवाया गया और फिर उन्हें शहर में घुमाया गया। इस मामले में भी 5 पुलिसकर्मी गिरफ्तार और सस्पेंड किए गए। साथ ही 5 बंदियों और 10 अन्य लोगों को भी पकड़ा गया।
जयपुर में दो डीसीपी ट्रैफिक पद बनने की चर्चा
जयपुर की बढ़ती जनसंख्या और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए, एक की जगह दो डीसीपी ट्रैफिक पद बनाने की चर्चा है। अभी केवल एक डीसीपी ट्रैफिक पूरे शहर की व्यवस्था देखते हैं, जो ज़्यादातर वीवीआईपी ड्यूटी में व्यस्त रहते हैं।
निष्कर्ष:
ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए गए सख्त कदमों से कुछ पुलिसकर्मी नाराज़ हैं, लेकिन ईमानदार अधिकारियों की रिपोर्ट और कार्रवाई से सुधार की उम्मीद बढ़ रही है।
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