दिल्ली विश्वविद्यालय में 84% लाने के बावजूद नौकरी नहीं, छात्रों ने उठाए सवाल
channel_009 | Education News
दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़ा एक बड़ा सवाल अब छात्रों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। दावा किया जा रहा है कि 84% अंक लाने के बावजूद भी कई छात्रों को नौकरी नहीं मिल रही, जिसके बाद प्लेसमेंट सिस्टम, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के अवसरों पर सवाल उठने लगे हैं।
छात्रों का कहना है कि अच्छे नंबर लाने के बाद भी अगर नौकरी नहीं मिलती, तो सिर्फ डिग्री और मार्क्स के आधार पर करियर सुरक्षित मानना मुश्किल हो गया है। उनका आरोप है कि कॉलेजों में पढ़ाई तो होती है, लेकिन इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से स्किल, ट्रेनिंग और करियर गाइडेंस पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता।
दिल्ली विश्वविद्यालय देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। यहां से पढ़ाई करने का सपना लाखों छात्र देखते हैं। ऐसे में अगर अच्छे अंकों के बावजूद छात्र नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो यह उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती दूरी को दिखाता है।
छात्रों ने प्लेसमेंट सेल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कॉलेजों में कंपनियों की संख्या, पैकेज, इंटर्नशिप और जॉब प्रोफाइल को लेकर ज्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए। कई छात्रों का मानना है कि सिर्फ थ्योरी आधारित पढ़ाई के बजाय कम्युनिकेशन, डिजिटल स्किल, डेटा, AI, मार्केटिंग और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर देना जरूरी है।
यह मामला सिर्फ दिल्ली विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के युवाओं की बड़ी चिंता को सामने लाता है—डिग्री के बाद रोजगार कहां है?
channel_009 निष्कर्ष:
84% अंक लाने के बावजूद नौकरी न मिलना छात्रों के लिए निराशाजनक है और शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत है कि विश्वविद्यालय डिग्री के साथ-साथ रोजगार योग्य स्किल्स और मजबूत प्लेसमेंट सिस्टम पर भी ध्यान दें।
आपकी राय क्या है — क्या आज के समय में अच्छे नंबर से ज्यादा स्किल और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग जरूरी हो गई है? कमेंट में बताइए।
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