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छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत समर्थन मूल्य पर धान खरीदी लक्ष्य से पीछे रह गई है। बस्तर संभाग में कुल 2,72,641 किसानों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन बड़ी संख्या में किसान अपना धान नहीं बेच पाए।
इस बार 44,612 पंजीकृत किसान धान नहीं बेच सके, जिससे खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
कई किसानों ने रकबा समर्पित किया
कुल 1,06,958 किसानों ने लगभग 40,751 हेक्टेयर रकबा समर्पित किया।
जिलेवार आंकड़े इस प्रकार हैं:
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बस्तर – 15,731 किसान
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बीजापुर – 5,308 किसान
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दंतेवाड़ा – 584 किसान
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कांकेर – 49,089 किसान
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कोंडागांव – 26,065 किसान
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नारायणपुर – 3,868 किसान
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सुकमा – 6,313 किसान
दंतेवाड़ा जिले में लक्ष्य का केवल 63.85 प्रतिशत ही पूरा हो सका।
धान परिवहन की रफ्तार धीमी
अब तक खरीदी गई कुल धान का केवल 21.88 प्रतिशत ही परिवहन हो पाया है। इससे भंडारण और प्रबंधन की समस्या बढ़ने की आशंका है।
किसानों ने तौल में देरी, भुगतान में विलंब और खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था जैसी समस्याओं की शिकायत की है।
किन जिलों में सबसे ज्यादा किसान प्रभावित
धान नहीं बेच पाने वाले किसानों की जिलेवार संख्या इस प्रकार है:
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बस्तर – 9,606 किसान
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कांकेर – 9,457 किसान
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कोंडागांव – 7,734 किसान
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दंतेवाड़ा – 6,412 किसान
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नारायणपुर – 4,257 किसान
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सुकमा – 4,284 किसान
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बीजापुर – 2,862 किसान
धान खरीदी अभियान खत्म होने के बाद अब किसानों और प्रशासन की नजर परिवहन और भुगतान व्यवस्था पर है। प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने का दावा किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
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