टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने हाल ही में उस दौर की यादें ताज़ा कीं, जब वे अचानक टीम से बाहर हो गए थे। इरफान ने खुलासा किया कि उस समय के कोच गैरी कर्स्टन ने उन्हें साफ कहा था – “कुछ चीजें मेरे हाथ में नहीं हैं, इसलिए मैं कुछ नहीं बता सकता।” इरफान को समझ आ गया था कि प्लेइंग इलेवन का फैसला कप्तान, कोच और मैनेजमेंट मिलकर करते हैं, और उस वक्त कप्तान महेंद्र सिंह धोनी थे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह धोनी का कॉल था कि उन्हें टीम में जगह न मिले, तो इरफान ने बेझिझक कहा – “हां, उस वक्त ये कॉल उनका ही था।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हर कप्तान को अपनी रणनीति के हिसाब से टीम चुनने का हक होता है, इसलिए वह इस पर बहस नहीं करेंगे कि फैसला सही था या गलत।
गैरी कर्स्टन ने एक और कारण भी बताया था – उस समय टीम को सातवें नंबर पर एक बैटिंग ऑलराउंडर चाहिए था, जिसमें यूसुफ पठान फिट बैठते थे। इरफान ने कहा, “यूसुफ भाई बैटिंग ऑलराउंडर थे, मैं बॉलिंग ऑलराउंडर था। दोनों का रोल अलग था, लेकिन टीम में सिर्फ एक ऑलराउंडर की जगह थी। आज के समय में तो लोग खुशी-खुशी टीम में दो ऑलराउंडर रखेंगे।”
टीम से बाहर होने के बाद इरफान ने सिर्फ तीन साल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। साल 2012 के टी20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेला गया मुकाबला उनके करियर का आखिरी इंटरनेशनल मैच साबित हुआ।
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