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मेड़ता रोड और आसपास के 30 गांवों में आज तक रोडवेज बसें नहीं चल रही हैं। ग्रामीण निजी बसों में सफर करने को मजबूर हैं और उन्हें सरकारी बस सेवा शुरू होने का इंतजार है।
मेड़ता रोड: रेलवे सुविधा तो है, लेकिन रोडवेज नहीं
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मेड़ता रोड जंक्शन देश के चार बड़े महानगरों और कई शहरों से जुड़ा है।
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हर दिन 80 से ज्यादा ट्रेनें यहां से गुजरती हैं।
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लेकिन यहां से नागौर जिला मुख्यालय के लिए कोई रोडवेज बस नहीं चलती।
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ग्रामीणों को निजी बसों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिनमें मनमाना किराया वसूला जाता है।
रोडवेज सेवा की कमी से ग्रामीण परेशान
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नागौर, अजमेर, जोधपुर, जैतारण, खींवसर, डेगाना, सीकर जैसे शहरों के लिए निजी बसें तो चलती हैं, लेकिन रोडवेज बसों की सुविधा नहीं है।
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अजमेर, बीकानेर, नागौर, जयपुर, हरिद्वार तक बसें आसानी से चलाई जा सकती हैं, लेकिन प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
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जो लोग रोजाना सफर करते हैं, उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
लंबे समय से चल रही है मांग
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ग्रामीणों ने कई बार रोडवेज बस सेवा शुरू करने की मांग की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
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पहले जोधपुर-ओलादन के बीच एकमात्र बस चलती थी, लेकिन वह भी चार साल पहले बंद हो गई।
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राज्य और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
धार्मिक और पर्यटन महत्व का कस्बा
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मेड़ता रोड का धार्मिक और पर्यटन महत्व भी बहुत ज्यादा है।
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ब्रह्माणी मंदिर, जैन तीर्थ पार्श्वनाथ मंदिर, मीरा बाई मंदिर, पुष्कर, बुटाटी धाम जैसे कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थल यहां के पास हैं।
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देश-विदेश से पर्यटक यहां आते हैं, लेकिन रोडवेज बस सुविधा न होने से उन्हें निजी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है।
अगर रोडवेज बस सेवा शुरू हो जाए तो
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लोगों को आरामदायक और सस्ती यात्रा मिल सकेगी।
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पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और सरकार को अच्छा राजस्व भी मिलेगा।
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ग्रामीणों को मनमाने किराए से राहत मिलेगी और उनकी यात्रा आसान होगी।
ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द रोडवेज बस सेवा शुरू की जाए ताकि उन्हें राहत मिल सके।
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