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बिहार राज्यसभा चुनाव: 202 विधायक होने के बाद भी NDA की 5वीं सीट पर क्यों सस्पेंस?

बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होने हैं। विधानसभा में NDA के पास 202 विधायक हैं, फिर भी 5वीं सीट को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। इसी वजह से राजनीतिक माहौल गरम है।


चुनाव की तारीख और प्रक्रिया

  • 26 फरवरी से नामांकन शुरू होगा।

  • 5 मार्च तक नामांकन भरे जाएंगे।

  • 9 मार्च तक नाम वापस लिए जा सकते हैं।

  • अगर उम्मीदवार ज्यादा हुए तो 16 मार्च को वोटिंग होगी।

  • अगर उम्मीदवार कम हुए तो निर्विरोध चुनाव भी हो सकता है।


जीत का गणित क्या है?

बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं।
एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है।

NDA के पास कुल 202 विधायक हैं:

  • BJP – 89

  • JDU – 85

  • LJP (रामविलास) – 19

  • HAM (सेक्युलर) – 5

  • RLM – 4

इस हिसाब से NDA आसानी से 4 सीटें जीत सकता है।
चार सीटों के बाद भी NDA के पास 38 वोट बचते हैं। लेकिन 5वीं सीट जीतने के लिए उसे कम से कम 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए होगा।


महागठबंधन की रणनीति

विपक्षी महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं:

  • RJD – 25

  • कांग्रेस – 6

  • वाम दल – कुछ विधायक

अगर AIMIM के 5 और BSP के 1 विधायक का समर्थन मिल जाए तो संख्या 41 तक पहुंच सकती है। यानी विपक्ष एक सीट जीत सकता है।

लेकिन AIMIM ने अभी साफ समर्थन नहीं दिया है। उसने कहा है कि संयुक्त उम्मीदवार पर विचार किया जाएगा।
BSP ने कहा है कि अंतिम फैसला पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर होगा।


NDA के अंदर भी खींचतान

सूत्रों के अनुसार BJP और JDU दो-दो सीटों पर दावा कर सकती हैं।
वहीं LJP, HAM और RLM भी एक-एक सीट की मांग कर रहे हैं।
उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी अपनी-अपनी पार्टी के लिए सीट चाहते हैं।

यही अंदरूनी खींचतान भी सस्पेंस बढ़ा रही है।


किनकी सीटें खाली हो रही हैं?

इस बार जिन नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें RJD और JDU के कई नेता शामिल हैं। कुछ नेताओं को दोबारा मौका मिलने की चर्चा भी चल रही है।


क्या नए चेहरे आएंगे?

चर्चा है कि BJP कुछ नए चेहरों को राज्यसभा भेज सकती है। जातीय और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखकर उम्मीदवार तय किए जाएंगे। लेकिन अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।


5वीं सीट पर असली मुकाबला

चार सीटें लगभग NDA को मिलती दिख रही हैं।
असल मुकाबला 5वीं सीट का है।

अगर विपक्ष एकजुट हो गया और AIMIM-BSP का समर्थन मिल गया तो मुकाबला दिलचस्प होगा।
लेकिन अगर NDA 5वीं सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारता, तो परंपरा के अनुसार विपक्ष को एक सीट मिल सकती है।

यही वजह है कि भारी बहुमत के बावजूद 5वीं सीट पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है।

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