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कभी प्याज तो कभी पेट्रोल… महंगाई ने कई बार हिलाई सत्ता, जनता की टूटी कमर
भारत की राजनीति में महंगाई हमेशा बड़ा मुद्दा रही है। कई बार बढ़ती कीमतों ने सिर्फ आम जनता की जेब पर असर नहीं डाला, बल्कि सरकारों की सत्ता तक हिला दी।
1998 में प्याज की आसमान छूती कीमतों ने देशभर में राजनीतिक भूचाल ला दिया था। दिल्ली समेत कई राज्यों में जनता के गुस्से का असर चुनावों में देखने को मिला और बीजेपी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। उस दौर में प्याज की कीमतें आम आदमी के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बन गई थीं।
इसके बाद 2012 में पेट्रोल, डीजल, गैस और रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतों को लेकर “महंगाई डायन” जैसे नारे देशभर में चर्चा का केंद्र बने। विपक्ष ने इसे बड़ा राजनीतिक हथियार बनाया और केंद्र सरकार को लगातार घेरा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में महंगाई सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सीधा राजनीतिक असर डालने वाला विषय भी रही है। जब-जब रसोई का बजट बिगड़ा, तब-तब जनता का गुस्सा सड़कों से लेकर चुनावी नतीजों तक दिखाई दिया।
आज भी बढ़ती महंगाई को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, क्योंकि इतिहास गवाह है कि महंगाई का असर सीधे जनता और सत्ता दोनों पर पड़ता है।
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