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फसलों के कचरे से बन रही बिजली, सरकार चाहे तो पराली जलाने की समस्या हो सकती है खत्म

नागौर (राजस्थान):
जिले के पूंजीयास गांव में एक ऐसा प्लांट चल रहा है, जो फसलों के कचरे (पराली व कृषि अपशिष्ट) से बिजली बना रहा है। इस बायोमास बेस्ड पावर प्लांट से किसानों को उनके खेतों में बचे कचरे के भी पैसे मिल रहे हैं और सरकार को बिजली। यह प्लांट पिछले 14 साल से चल रहा है, लेकिन अब तक इस तरह का कोई और नया प्लांट जिले में नहीं लग पाया है।

किसानों को मिल रही कमाई, सरकार को बिजली

इस प्लांट से रोजाना 7 से 8 मेगावाट बिजली बनाकर सरकार को दी जा रही है। बिजली सप्लाई के बदले सरकार की ओर से प्रति यूनिट ₹5.78 रुपए का भुगतान किया जाता है।
प्लांट में सरसों, रायड़ा, सौंफ, जीरा, इसबगोल जैसी फसलों के कचरे का उपयोग होता है। इससे हर साल किसानों से करीब 22–23 करोड़ रुपए का कचरा खरीदा जा रहा है। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ रही है, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा हो रहा है।

क्या है बायोमास प्लांट?

  • शुरुआत: साल 2011 में भारत सरकार की योजना के तहत प्लांट की स्थापना हुई।

  • लागत: करीब ₹56 करोड़ में बना।

  • सप्लाई: प्लांट से बनी बिजली 132 केवी जीएसएस मेड़ता रोड पर भेजी जाती है, जहां से यह आस-पास के गांवों में सप्लाई होती है।

  • मटेरियल: खेतों से निकला कचरा (पराली) और पानी से बिजली बनाई जाती है।

पराली जलाने की समस्या का समाधान

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में हर साल फसल कटाई के बाद पराली जलाने से प्रदूषण फैलता है। कोर्ट की रोक के बावजूद पराली जलाना अब भी जारी है। अगर सरकार बायोमास प्लांट लगाने को बढ़ावा दे, तो यह कचरा जलने की बजाय बिजली बनाने में काम आ सकता है।

सौर ऊर्जा के साथ अच्छा विकल्प

हालांकि सरकार सौर ऊर्जा पर ध्यान दे रही है, लेकिन इसके लिए पेड़ काटने की ज़रूरत पड़ती है। इसके मुकाबले बायोमास ऊर्जा एक बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प हो सकता है।

जनरल मैनेजर का कहना

जितेन्द्र कुमार, जो सत्यम बायोमास पावर प्लांट के जनरल मैनेजर हैं, उन्होंने बताया:

“हम किसानों से हर साल फसलों का कचरा खरीदते हैं और उससे बिजली बनाते हैं। इससे किसानों को आमदनी मिलती है और सरकार को बिजली। अगर सरकार ऐसे और प्लांट लगाए, तो पराली की समस्या खत्म हो सकती है।”


👉 निष्कर्ष: अगर सरकार बायोमास प्लांट्स को प्रोत्साहित करे, तो पराली जलाने की गंभीर समस्या का हल निकाला जा सकता है। इससे किसानों को फायदा, बिजली उत्पादन में इजाफा और पर्यावरण को राहत—all-in-one समाधान मिल सकता है।

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