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दुनिया भर में बच्चों और किशोरों में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) यानी किडनी की गंभीर बीमारी तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में आई एक वैश्विक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि गरीब और कम स्वास्थ्य सुविधाओं वाले क्षेत्रों में इसका असर ज्यादा गंभीर देखा जा रहा है।
कितने बच्चे हो रहे प्रभावित?
यह अध्ययन 0 से 19 साल तक के बच्चों और किशोरों पर किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में दुनियाभर में करीब 75 लाख से अधिक बच्चों और किशोरों में CKD के नए मामले सामने आए। यानी हर 1 लाख बच्चों में लगभग 29 नए केस दर्ज किए गए।
किशोरों में ज्यादा बढ़ रहे मामले
सबसे ज्यादा चिंता 14 से 19 साल के किशोरों को लेकर है। इस उम्र के बच्चों में बीमारी के मामलों में 44% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बदलती जीवनशैली, बीमारी की देर से पहचान और समय पर इलाज न मिलना इसके मुख्य कारण हो सकते हैं।
गरीब इलाकों में ज्यादा खतरा
रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं कम हैं, वहां इस बीमारी से बच्चों की मौत ज्यादा हो रही है। यानी यह सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता से भी जुड़ी हुई है। उदाहरण के लिए, सेंट्रल एशिया में सबसे ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए।
इलाज की सुविधा से मिलता है फायदा
जहां डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां बच्चों की हालत बेहतर रहती है। लेकिन जिन जगहों पर ये सुविधाएं नहीं हैं, वहां बीमारी का असर ज्यादा गंभीर होता है और मौत का खतरा बढ़ जाता है।
भविष्य की उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, अगर स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर की जाएं तो साल 2050 तक इस बीमारी के नए मामलों में कुछ कमी आ सकती है। लेकिन यह सुधार हर देश में समान नहीं होगा।
क्या करना जरूरी है?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी से बचाव के लिए जल्दी जांच, सही समय पर इलाज और जागरूकता बहुत जरूरी है। खासकर कम संसाधनों वाले इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना बेहद आवश्यक है।
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