दमोह:
जिले में मानसून की दस्तक हो चुकी है, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी बारिश में जलमग्न होने वाले पुल-पुलियों पर कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। यह लापरवाही लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन सकती है।
🌧️ हर साल दोहराता है खतरा
दमोह के पथरिया, बटियागढ़, हटा, मड़ियादो, तेजगढ़, तेंदूखेड़ा और पटेरा जैसे इलाकों में बारिश के दौरान नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं। इससे पुल-पुलियां डूब जाती हैं और गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से कट जाता है। इसके बावजूद ना चेतावनी बोर्ड लगे हैं, ना बैरिकेडिंग हुई है और ना सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं।
⚠️ पिछले सालों में गई कई जानें
बीते साल तेज बहाव या डूबने से आधा दर्जन से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं, जिनमें:
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करैया राख के ध्रुव पटेल
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पिपरिया के भूतप सिंह
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टीकमगढ़ के सूरज लोधी
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बेलखेड़ी, हटरी, भैंसा गांव, खमरिया असाटी और जमुनिया की दो बहनें शामिल थीं।
ज्यादातर हादसे उन्हीं जगहों पर हुए जहां समय रहते चेतावनी नहीं दी गई थी।
📋 प्रशासन की तैयारी सिर्फ कागजों तक
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन हर बार हादसे के बाद ही जागता है। जबकि किन-किन जगहों पर खतरा होता है, यह पहले से पता है, फिर भी ना बोर्ड लगाए जाते हैं, ना अवरोधक और ना ही गार्ड तैनात होते हैं।
इस बार भी आपदा प्रबंधन की तैयारी सिर्फ दिखावे तक सीमित लग रही है।
👉 जरूरत है कि प्रशासन वक्त रहते इन संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा इंतजाम करे, ताकि लोगों की जानें बचाई जा सकें।
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