नई दिल्ली:
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने के फैसले को “गैरकानूनी और उकसावे वाला” बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भारत ने जल को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया, तो पाकिस्तान “जवाबी कार्रवाई” करने को मजबूर होगा।
भुट्टो ने यह बयान पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में बजट सत्र के दौरान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद बिना किसी अंतरराष्ट्रीय सहमति के 1960 की ऐतिहासिक संधि को एकतरफा रोक दिया।
“भारत के पास दो ही रास्ते हैं – या तो पानी न्यायसंगत रूप से बांटे, या फिर हम छहों नदियों से अपना हक ले लेंगे,” उन्होंने कहा।
🔍 भारत का रुख क्या है?
भारत के गृह मंत्री अमित शाह पहले ही साफ कर चुके हैं कि “अब यह संधि बहाल नहीं की जाएगी।” यह संकेत भारत की बदली हुई नीति को दर्शाता है, जिसमें अब आतंकवाद को सहन नहीं करने का दृष्टिकोण अपनाया गया है।
🇵🇰 पाकिस्तान पर संभावित असर
🌾 कृषि पर करारा प्रहार
पाकिस्तान की खेती का 80% से अधिक हिस्सा इंडस, झेलम और चिनाब नदियों पर निर्भर है। यदि भारत जल प्रवाह को रोकता है या उसमें देरी करता है, तो गेंहू, चावल, गन्ना और कपास जैसी फसलों की पैदावार में 30–40% तक की गिरावट आ सकती है।
जहां लगभग 40% आबादी कृषि में लगी है, वहां यह संकट भयंकर खाद्य संकट में बदल सकता है।
⚡ ऊर्जा संकट का खतरा
पाकिस्तान के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स जैसे टर्बेला, मंगला और नीलम-झेलम को सुचारू जल प्रवाह की आवश्यकता होती है। जल की आपूर्ति घटने से उत्पादन घटेगा, जिससे देश को महंगा थर्मल और आयातित ईंधन खरीदना पड़ेगा।
इससे बिजली की कटौती, महंगाई और आर्थिक संकट और बढ़ सकते हैं।
🚱 पानी की किल्लत और सामाजिक तनाव
कराची, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे शहरों की पीने के पानी की सप्लाई पर भी असर पड़ेगा। ग्रामीण इलाकों में ज़मीन के नीचे का पानी निकालने का दबाव बढ़ेगा, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बिगड़ेगी।
पंजाब और सिंध जैसे राज्यों में पानी को लेकर आपसी संघर्ष भी तेज़ हो सकते हैं।
📉 आर्थिक गिरावट
कृषि alone पाकिस्तान की GDP का 24% से अधिक योगदान देती है। जल संकट के चलते GDP में 1.5%–2% सालाना नुकसान हो सकता है। निर्यात घटेगा, महंगाई बढ़ेगी, और सरकार को अधिक सब्सिडी देनी पड़ेगी।
🌊 पर्यावरणीय संकट
इंडस डेल्टा पहले से ही खारे पानी के कारण प्रभावित हो रहा है। जल प्रवाह में और कमी से यह क्षेत्र और नष्ट होगा, जिससे मछलीपालन, जैव विविधता और तटीय समुदायों पर गहरा असर पड़ेगा।
🇮🇳 भारत का क्या इरादा हो सकता है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की कार्रवाई केवल एक कूटनीतिक दबाव का हिस्सा है, जो पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने की प्रतिक्रिया में है। यदि पाकिस्तान बातचीत की मेज़ पर लौटता है, तो भारत कोई नया समाधान प्रस्तावित कर सकता है – लेकिन मौजूदा हालात में जल-नीति अब रणनीतिक हथियार बन चुकी है।
CHANNEL009 Connects India
