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बिहार में इस बार मॉनसून ने बुरी तरह से असर डाला है। राज्य के कई जिलों में बारिश बहुत कम हुई है, तो वहीं दूसरी तरफ कई इलाकों में नदियां उफान पर हैं और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
बारिश का हाल
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सामान्य तौर पर बिहार में मॉनसून सीजन में 1,137 मिमी बारिश होती है।
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अब तक केवल 554 मिमी बारिश हुई है, यानी सामान्य से 228 मिमी कम।
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नतीजतन, 12 जिले सूखे की चपेट में हैं और 26 जिले बाढ़ से जूझ रहे हैं।
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12 लाख से ज्यादा लोग बेघर होकर राहत शिविरों और सड़कों पर रह रहे हैं।
बारिश कम होने की वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बारिश कम होने के 3 कारण हैं:
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मॉनसून ट्रैक का बदलाव – इस बार बारिश का रुख झारखंड और मध्य भारत की ओर चला गया।
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बंगाल की खाड़ी में बदलाव – यहां बने लो-प्रेशर सिस्टम बिहार की बजाय मध्यप्रदेश की तरफ बढ़ गए।
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स्थानीय सिस्टम का अभाव – बिहार में लोकल सिस्टम नहीं बने, जिससे अतिरिक्त बारिश नहीं हो पाई।
मौसम विभाग का अनुमान है कि सितंबर में 300 मिमी से ज्यादा बारिश हो सकती है, खासकर 11 से 18 सितंबर के बीच। लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि पूरे साल की कमी पूरी होना मुश्किल है।
नदियों का उफान
नेपाल में भारी बारिश के कारण गंगा, कोसी और गंडक नदियां उफान पर हैं।
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भागलपुर में गंगा का पानी बरारी, आदमपुर, नाथनगर और तातारपुर तक पहुंच गया। TMBU यूनिवर्सिटी परिसर में भी पानी घुस गया।
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मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से सिर्फ 6 सेमी नीचे बह रही है। छह ब्लॉक जलमग्न हो गए हैं।
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जहानाबाद में फल्गु नदी का बांध टूटने से 50 गांव डूब गए। धान की फसल बर्बाद हो गई और मत्स्य पालकों को करीब 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
अगस्त का मौसम रिकॉर्ड
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सबसे ज्यादा औसत तापमान : मुंगेर – 32.6°C
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सबसे गर्म दिन : सुपौल – 36.6°C (7 अगस्त)
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सबसे भारी बारिश : पूर्णिया – 270.6 मिमी (4 अगस्त)
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कुल बारिश : सामान्य से 9% कम
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बिजली गिरने की घटनाएं : 26 दिन
असर
बारिश की कमी से खरीफ फसलें बर्बाद हो गई हैं और भूजल संकट गहराने की संभावना है। वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोग राहत और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
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