भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि जज़्बातों और टकराव की एक यादगार दास्तान बन गई। खासकर तीसरे टेस्ट से सीरीज में गर्मी काफी बढ़ गई थी, जब लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान शुभमन गिल और इंग्लैंड के बल्लेबाज जैक क्रॉली के बीच तीखी नोकझोंक हो गई थी।
तीसरे दिन जैक क्रॉली धीमी बल्लेबाज़ी कर रहे थे और समय खराब करने की कोशिश कर रहे थे। इस बात से नाराज़ भारतीय बल्लेबाज़ शुभमन गिल ने उन्हें मैदान पर ही खरी-खोटी सुना दी। कैमरों में दोनों के बीच हुई बहस साफ़ नजर आई। इसके बाद से हर टेस्ट मैच में किसी न किसी खिलाड़ी के बीच बहस या टकराव देखने को मिला – चाहे वो विराट कोहली और ओली पोप हों या जसप्रीत बुमराह और बेन डकेट।
अब जब ओवल टेस्ट खत्म हो चुका है और सीरीज का नतीजा आ चुका है, इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने इस पूरे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा: “मुझे अपने खिलाड़ियों पर गर्व है कि उन्होंने मैदान पर जोश और जज़्बे के साथ खेला। मुझे पूरा भरोसा है कि शुभमन गिल भी यही महसूस कर रहे होंगे। भारत-इंग्लैंड की सीरीज हमेशा खास रही है – इसमें इमोशंस बहुत होते हैं। मैदान पर जो कुछ भी कहा गया, वो मैदान तक ही सीमित रहा। कोई भी खिलाड़ी इसे लेकर बिस्तर पर जाकर रोने वाला नहीं है – न हमारी टीम से, न भारतीय टीम से। ये सब जुनून में हो जाता है, और ऐसा होना खेल का हिस्सा है।”
हालांकि सीरीज में कई बार टकराव की स्थिति बनी, लेकिन अंत में दोनों टीमों ने एक-दूसरे का सम्मान भी दिखाया। आखिरी टेस्ट के बाद खिलाड़ियों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, बातचीत की और जश्न में शरीक हुए। यह दिखाता है कि चाहे मैदान पर कितना भी तनाव क्यों न हो, क्रिकेट की असली ताकत खेल भावना में है।
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