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ब्लैकबोर्ड-‘दादा ईसाई बन गए थे,कब्र खोदकर ले गए लाश’:गांव वाले बोले- शव को शराब पिलाए बगैर नहीं दफना सकते

दादा ईसाई बन गए थे, कब्र खोदकर शव ले गए परिजन; गांव में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद

एक गांव में अंतिम संस्कार की परंपरा और धर्म परिवर्तन से जुड़ा मामला चर्चा में आ गया है। परिजनों का कहना है कि उनके दादा ने ईसाई धर्म अपना लिया था, इसलिए उन्हें ईसाई रीति-रिवाज से दफनाया गया था। लेकिन बाद में गांव की परंपरा को लेकर विवाद बढ़ गया और परिजन कब्र खोदकर शव अपने साथ ले गए।

गांव वालों का कहना है कि उनके यहां अंतिम संस्कार से पहले कुछ पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, शव को शराब चढ़ाए या पिलाए बिना दफनाने की अनुमति नहीं दी जाती। इसी बात को लेकर परिवार और गांव वालों के बीच विवाद हो गया।

परिजनों का आरोप है कि दादा की धार्मिक आस्था का सम्मान नहीं किया गया। उनका कहना है कि जब उन्होंने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था, तो अंतिम संस्कार भी उसी रीति से होना चाहिए था। वहीं गांव वालों का कहना है कि गांव की पुरानी परंपरा को तोड़ना आसान नहीं है और सभी परिवारों को सामुदायिक नियमों का पालन करना चाहिए।

मामला सामने आने के बाद इलाके में सामाजिक और धार्मिक बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत आस्था का मामला बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग गांव की परंपरा को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर प्रशासन और समाज के जिम्मेदार लोगों से अपील की जा रही है कि ऐसे मामलों में शांति बनाए रखी जाए और परिवार की इच्छा, मृतक की आस्था और कानून—तीनों का सम्मान किया जाए।

यह घटना दिखाती है कि कई ग्रामीण इलाकों में आज भी परंपरा, धर्म और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच टकराव की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और संवाद से ही समाधान निकाला जा सकता है।

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